रामलला का परिवार संग पूजन करते सतीश चंद्र मिश्र
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पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर चल रही बहुजन समाज पार्टी को प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी के जरिए शुक्रवार को सतीश चंद्र मिश्रा संजीवनी दे गए। इस सम्मेलन के जरिए ब्राह्मणों को साधने में बसपा कितना सफल होगी, यह तो भविष्य के गर्त में है, लेकिन जिले से लेकर मंडल तक बसपा की अंतर्धारा में सियासी गर्मी जरूर आएगी।
बहुजन समाज पार्टी एक दशक पूर्व जिले में मजबूत राजनीतिक दल के रूप में उभरकर सामने आई थी। वर्ष 2004 के चुनाव में बसपा के टिकट पर कद्दावर नेता रहे मित्रसेन यादव सांसद चुने गए तो कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ा। ब्राह्मण-दलित कार्ड के बदौलत वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा पूरे प्रदेश में बहुमत में आई तो जिले से भी दो सीटें बसपा की झोली में गईं।
मिल्कीपुर विधानसभा से आनंदसेन यादव व बीकापुर सीट से जितेंद्र सिंह बबलू चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन 2012 में हुए चुनाव में बसपा जिले में भी औंधे मुंह गिर गई। जिले की पांचों विधानसभा की सीटों पर बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान समय में पार्टी अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रही है।
वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव व 2017 में विधानसभा चुनाव में भी बसपा खाता खोलने के लिए जूझती रही। पंचायत चुनावों में इक्का-दुक्का सीटें जीतने के अलावा विधानसभा व लोकसभा के चुनाव में बसपा जिले में कमजोर ही दिखी। मौजूदा समय में जिले में कई पुराने नेता भी पार्टी से किनारा कस चुके हैं। वहीं, 2017 के चुनाव के बाद से जिले में बहुजन समाज पार्टी का कोई बड़ा कार्यक्रम न होने की वजह से कार्यकर्ता भी शांत हो गये। लेकिन शुक्रवार को प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी के आयोजन से पूर्व जिले में बसपा समर्थकों में भी उत्साह नजर आया।
तीन दिन पूर्व से कार्यक्रम के संयोजक व वरिष्ठ बसपा नेता करुणाकर पांडेय की अगुवाई में वृहद कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। जिले की सीमा से लेकर जिले भर में बसपा की तमाम बड़ी-बड़ी होर्डिंगों से प्रमुख स्थल पट गए। देवकाली पर भी कार्यक्रम स्थल के निकट नीले झंडे और होर्डिंगें ही नजर आ रहे थे। सुबह दस बजे से ही कार्यक्रम स्थल पर अयोध्या सहित, अंबेडकरनगर, बस्ती, सुल्तानपुर तक के कार्यकर्ता व बसपा समर्थित लोगों का हुजूम उमड़ने लगा।
दोपहर बारह बजे तक विशाल मंच पर जब राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा पहुंचे तो कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था। काफी देर तक गगनभेदी नारों के बीच बसपा राष्ट्रीय महासचिव के भाषण से कार्यकर्ता गदगद हो गए और एक भर फिर से पुराने जोश व उत्साह से लबरेज हो गए। कार्यक्रम के दौरान भी कार्यकर्ताओं के बीच इस बात की चर्चाएं भी होती रहीं। इस तरह जाहिर है कि इस सम्मेलन का फायदा तो दूर की बात है मौजूदा समय में जिले में दम तोड़ रही बसपा के लिए यह कार्यक्रम किसी संजीवनी से कम नहीं रहा।