सरकार की साड़ी-कंबल स्कीम से केवल गरीबों की ही उम्मीद नहीं बढ़ी है, कई और की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं।
लुधियाना से लेकर सूरत और जयपुर से लेकर पटियाला तक के लोग दौड़े चले आ रहे हैं। इन लोगों को पहले किसी ने बताया था कि केवल लखनऊ में एक ही जगह बात करनी होगी, बात बन जाएगी। अब यहां आने पर कहा जा रहा है कि इसके लिए तय सप्लाई फर्मों से बात करो। यहां तक भी बात समझ में आती थी।
मगर अब समझाया जा रहा है कि ऑर्डर लेने के लिए जिलों से सहमति लाओ, तब ही बात होगी। इस तरह का दुखड़ा लिए कई लोग सचिवालय का चक्कर काट रहे हैं। कोई इन्हें बता रहा है कि किसको कितनी सप्लाई लेनी है, किससे लेनी है, किसको देनी है।
सब फाइनल हो गया तो कोई समझा रहा है कि जुगाड़ लगा लोगे तो अभी भी मौका मिल सकता है। आखिरकार एक ने विभाग के एक अफसर को पकड़ ही लिया। अफसर ने समझाया कि लखनऊ का चक्कर छोड़ दो।
हम लोगों ने अपने को इस झमेले से दूर कर लिया है। आज नहीं तो कल, इसकी जांच होनी पक्की है, ऐसे में कौन फंसाए अपने को। जिलों के मत्थे सब डाल दिया गया है।
अगर वास्तव में सप्लाई के लिए गंभीर हो तो अक्ल लगाओ..अपनी तरह के ऐसे एक-दो लोगों से संपर्क करो जो बाधा पार कर चुके हैं। वे ही तरीका बताएंगे। बस मैं उनका नंबर बता दे रहा हूं...बाकी आपकी इच्छा।