गोमती नगर स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में चल रहे संस्कृत महोत्सव का
दूसरा दिन संस्कृत काव्य गोष्ठी के नाम रहा।
संपूर्णानंद संस्कृत
विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व कुलपति आचार्य अभिराज राजेंद्र मिश्र ने
सांपों पर लिखी अपनी ही कविता सुनाकर लोगों को मुग्ध किया।
उन्होंने
‘साधुतां मा चरेयु, भुजंगा: कथम्, बन्धुता: दर्शयेयु’ कविता से सांपों की
गलती क्या है... सुनाया।
डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फपुर
(बिहार) के प्रो. सतीशचंद्र झा ने ‘सर्वसुवणै: निर्मिताया: संस्कृत’ कविता
सुनाई।
इसके अलावा संस्थान के पूर्व प्राचार्य प्रो. उमारमण झा, व्याकरण
विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र पाठक, साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. रामलखन
पांडेय ने भी काव्य कृतियां सुनाईं।
मौके पर मनीष कुमार, आनंद प्रकाश पाठक,
आचार्य युगलकिशोर, प्रो. शिशिर कुमार पांडेय, प्रो. विजय कुमार जैन समेत
तमाम संस्कृत विद्वान, शिक्षक और छात्र मौजूद थे।