लखनऊ। प्रदेश के प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, आयुर्वेदिक एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में संस्कृत अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति एवं साहित्य की शिक्षा एक साथ उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत इच्छुक उच्च शिक्षण संस्थान संस्कृत अध्ययन केंद्र संचालित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट csucska sanskrit.ac.in पर 30 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जारी रहेगी। आवेदन के बाद संबंधित दस्तावेज ईमेल के माध्यम से जमा करने होंगे।
संस्कृत भाषा प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम में 15 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी इच्छुक अभ्यर्थी प्रवेश ले सकता है। पाठ्यक्रम का उद्देश्य दैनिक जीवन में संस्कृत भाषा के सरल इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिससे बोलने, लिखने और पढ़ने की प्रारंभिक क्षमता विकसित हो सके। इस पाठ्यक्रम में ‘प्रथमा दीक्षा’ के अंतर्गत वर्णमाला, वाक्य व्यवहार, वाक्य विस्तार, संभाषण और परिशिष्टम् विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। पाठ्यक्रम की अवधि न्यूनतम 120 घंटे निर्धारित की गई है।
संस्कृत अध्ययन केंद्रों में दो प्रकार के पाठ्यक्रम संचालित होंगे। संस्कृत भाषा प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम और संस्कृत भाषा दक्षता पाठ्यक्रम। प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी के साथ-साथ आम नागरिक भी प्रवेश ले सकेंगे। वहीं, दक्षता पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।
इन केंद्रों के माध्यम से सरल और वैज्ञानिक पद्धति से संस्कृत भाषा का अध्ययन कराया जाएगा, जिससे श्रवण, भाषण, पठन और लेखन कौशल का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।