लखनऊ। असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय और अहं ब्रह्मास्मि जैसे श्लोक मानसिक बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं। सेंटर ऑफ बायो मेडिकल रिसर्च के अध्ययन में इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं। अध्ययन में देखा गया कि संस्कृत के श्लोक सुनने से मस्तिष्क के कई हिस्से सकारात्मक रूप से सक्रिय होते हैं। किसी अन्य भाषा के मामले में ऐसा नहीं होता। इस अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित किया गया है।
संस्थान के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने बताया कि संस्थान में काफी समय से वैदिक संस्कृत पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2012 से मस्तिष्क और आध्यात्म के संबंध को लेकर अध्ययन हो रहे हैं। यह अध्ययन उत्तम कुमार, हिमांशु राज पांडेय, कल्पना धानिक और प्रकाश पाडकण्या ने किया है। अध्ययन में 44 व्यक्तियों को शामिल किया गया। इनमें से 22 व्यक्ति संस्कृत के विद्वान थे और औसतन 12 साल वैदिक संस्कृत की शिक्षा ले चुके थे। वहीं, अन्य 22 व्यक्ति हिंदी और अंग्रेजी के जानकार थे और इनको संस्कृत का ज्ञान नहीं था।
एमआरआई से की गई मस्तिष्क क्रियाशीलता की जांच
मस्तिष्क की क्रियाशीलता जांचने के लिए एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) का सहारा लिया गया। संस्कृत के श्लोक का प्रभाव जांचने के लिए कुछ श्लोक चुने गए। इस दौरान बिना अर्थवाले संस्कृत के शब्दों को लेकर बनावटी श्लोक भी गढ़े गए। इसके बाद दोनों समूह के व्यक्तियों को जांच के लिए बुलाया गया और दोनों प्रकार के श्लोक बारी-बारी से उन्हें सुनाए गए। जांच रिपोर्ट में देखा गया कि वास्तविक श्लोक सुनकर संस्कृत के विद्वान समूह का मस्तिष्क सामान्य के मुकाबले काफी सक्रिय दिखा। यह सक्रियता बनावटी श्लोक सुनते समय रिकॉर्ड नहीं हुई। वहीं, संस्कृत के गैर विद्वान समूह के मामले में मस्तिष्क की सक्रियता किसी भी श्लोक के मामले में नहीं देखी गई। इसका मतलब संस्कृत के जानकार व्यक्तियों का मस्तिष्क श्लोक सुनकर सकारात्मक रूप से सक्रिय होता है।
श्लोक सुनकर जागृत हुआ चित्र और संगीत वाला हिस्सा
जांच रिपोर्ट से पता चला कि श्लोक सुनने के दौरान संस्कृत के विद्वान व्यक्तियों के मस्तिष्क में वे हिस्से भी सक्रिय हुए जो या तो संगीत सुनते समय होते हैं या फिर चित्र देखते समय। अल्जाइमर जैसी बीमारी में मस्तिष्क के टेंपोरल क्षेत्र में सबसे पहले निष्क्रियता दिखी। श्लोक सुनते समय मस्तिष्क का यह भाग भी सक्रिय हुआ। इसका मतलब आने वाले दिनों में श्लोक के माध्यम से मानसिक समस्याओं का उपचार संभव होगा।