उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान में आयोजन के दौरान मंच मौजूद वक्ता। स्रोत ः संस्थान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से मंगलवार को 10 दिवसीय आवासीय सरल संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। 19 मार्च तक चलने वाले इस शिविर में देश के विभिन्न जनपदों और राज्यों से आए प्रतिभागी संस्कृत भाषा के व्यावहारिक प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।
एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई), आगरा के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. प्रद्युम्न कुमार गुप्ता ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार है। इसे समाज में पुनः जीवंत करने की आवश्यकता है। संस्कृत भारत की सांस्कृतिक आत्मा है और इसके संरक्षण व प्रसार के लिए ऐसे प्रशिक्षण शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने कहा कि संस्कृत के माध्यम से भारतीय ज्ञान, परंपराओं और संस्कारों का व्यापक प्रसार होता है। योजना प्रभारी भगवान सिंह चौहान ने बताया कि शिविर में प्रतिभागियों को सरल और व्यावहारिक पद्धति से संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा, ताकि वे दैनिक जीवन में भी इसका इस्तेमाल कर सकें। शिविर में प्रशिक्षक धीरज मैठाणी, अनिल गौतम तथा प्रशिक्षिका राधा शर्मा और पूनम सिंह प्रतिभागियों को संवाद, गतिविधियों और समूह अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण शिविर में उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जनपदों के साथ-साथ उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी प्रतिभागी शामिल हुए हैं। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ, बरेली, मथुरा और आगरा सहित कई जनपदों के प्रतिनिधि इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।