गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या के मामले में एसआईटी ने बृहस्पतिवार को तफ्तीश तेज कर दी। छह घंटे तक प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पहुंचकर सुबूत जुटाए। पुलिस ने शूटर विजय यादव के पास से उसका मोबाइल बरामद कर जांच को भेज दिया है।
लखनऊ। गैंगस्टर संजीव उर्फ जीवा हत्याकांड को अंजाम भले ही शूटर विजय यादव उर्फ आनंद ने दिया हो लेकिन इसका असल किरदार अभी पर्दे के पीछे है। सवाल है कि विजय का आका कौन है? शुरुआती जांच में पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक तार जुड़ रहे हैं। बड़े गैंग से लेकर एक पूर्व सांसद भी जांच की जद में है।
विज्ञापन
अब देखना होगा कि एसआईटी कत्ल के मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंच पाती है या नहीं। जीवा पर गोलियां बरसाने वाला विजय बड़ा अपराधी नहीं था। जीवा से से उसकी कोई रंजिश नहीं थी। ऐसे में उसकी हत्या उसने क्यों की, यह सवाल बड़ा अहम है।
जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया है, उससे स्पष्ट है कि यह कांट्रेक्ट किलिंग है, जिसकी साजिश काफी पहले रची गई। विजय को वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया। इसलिए उसने शार्प शूटर की तरह वारदात को अंजाम दिया।
विज्ञापन
एसआईटी ने प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों के दर्ज किए बयान, घटनास्थल से जुटाए साक्ष्य
उधर, गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या के मामले में एसआईटी ने बृहस्पतिवार को तफ्तीश तेज कर दी। छह घंटे तक प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पहुंचकर सुबूत जुटाए। पुलिस ने शूटर विजय यादव के पास से उसका मोबाइल बरामद कर जांच को भेज दिया है। आशंका है कि इसका डाटा डिलीट किया गया है, जिसे रिकवर कराया जाएगा। इससे बड़े राज या फिर पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।
प्रकरण में सीएम के आदेश पर एडीजी टेक्निकल मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने तफ्तीश शुरू की थी। वारदात के वक्त जिन दस पुलिसकर्मियों की अभिरक्षा में संजीव को लाया गया था, उनके बयान दर्ज किए। कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से भी एसआईटी ने जानकारी ली।
कोर्ट की अनुमति लेकर जुटाएंगे सीसीटीवी फुटेज
एसआईटी ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज जुटाने का प्रयास शुरू कर दिया है। कोर्ट परिसर के आसपास लगे फुटेज खंगाल रही है। कोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पाने का जल्द अदालत से अनुमति ली जाएगी।
चर्चा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी हो सकती थी जीवा की पेशी
कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या के बाद ये चर्चा आम है कि अगर उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया जाता तो शायद यह वारदात नहीं होती। आरोपियों की पेशी कराने के लिए पुराने जिला जज कोर्ट के बगल में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम बनाया गया है, जिसे सुनवाई के समय जेल में बने कोर्ट से जोड़ दिया जाता है। कोर्ट में बने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में एक न्यायिक अधिकारी बैठकर जेल से पेश होने वाले सभी आरोपियों के मामलों की सुनवाई करके तारीख देता है।
मालूम हो कि कचहरी परिसर में जेल से लाकर पेश किए जाने वाले आरोपियों की संख्या बढ़ाने और कई आरोपियों के अभिरक्षा से भाग जाने की घटना के बाद शासन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए कोर्ट में व्यवस्था की थी। दरअसल, जेल में बंद उन आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की जाती है, जिनके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट नहीं दाखिल की होती है। चार्जशीट दाखिल किए बिना गवाही नहीं हो सकती।
दूसरी ओर, चार्जशीट लगने के बाद आरोपियों की पेशी व्यक्तिगत रूप से आवश्यक होती है। लेकिन कुछ खतरनाक आरोपियों के मामले में जानमाल का खतरा देखते हुए कोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करने का आदेश देती है। तत्कालीन जिला जज केके शर्मा ने लखनऊ के व्यापारियों को धमकाने की शिकायत पर चार अक्तूबर 2013 को आदेश दिया था कि तिहाड़ जेल में बंद सीरियल किलर भाइयों सलीम, रुस्तम और सोहराब की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कराई जाए। इसी तरह कई मामलों में जेल में बंद मुख्तार अंसारी के मामले की सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही की जाती है।