प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय घटना को घटित होने के पूर्व ही आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां से भी पीएसी व एसडीआरएफ की मांग हो रही हो, वहां तत्काल बिना किसी विलम्ब के भेजा जाए। बाढ़ राहत कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन किया जाए। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोकभवन में आयोजित बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डीएम लगातार भ्रमण करें ताकि कोई भी अप्रिय घटना घटित न होने पाए। संबंधित जिलों के डीएम को पीएसी व एसडीआरएफ के साथ ईधन सहित वाहन भी भेजे जाएं। अभियान की समाप्ति के बाद वाहनों को तुरंत अगले मोर्चे के लिए रवाना कर दिया जाए। बैठक में बताया गया कि राहत व बचाव कार्यो के लिए एसडीआरएफ ने जिलों में 10,200 आपदा मित्रों मे से अब तक 7952 को प्रशिक्षण दिया है।
एसडीआरएफ की तीन कंपनियो की 9 टीमों को वाराणसी, इटावा, मीरजापुर, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद एवं लखनऊ में तैनात किया गया है। इनके आवागमन के लिए 18 ट्रक, 6 बस, 12 ट्रेवलर, 17 टीयूवी, 12 बोलेरो व 5 एम्बुलेंस उपलब्ध है। टीमों के आपसी संपर्क के लिए 20 मोबाइल, 60 हैंडहेल्ड सेट, 17 सेटेलाइट फोन व 4 बीजीएएन टर्मिनल (ब्रॉडबैंड ग्लोबल एरिया नेटवर्क) उपलब्ध है। बैठक में सचिव गृह एवी राजामौलि, एडीजी पीएसी केएस प्रताप, विशेष सचिव गृह डाॅ. अनिल कुमार सिंह तथा कमांडेंट एसडीआरएफ सतीश कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को प्राथमिकता
बैठक में निर्देश दिये गये कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बच्चों, महिलाओं व बुजुर्ग व्यक्तियों को प्राथमिकता पर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाा जाए। इसी तरह मवेशियों को भी संभावित बाढ़ से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाए। बाढ़ से प्रभावित जनता के लिये राहत सामग्री का वितरण भी कराया जाए।