फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएचयू विवाद संभालने को संघ भी सक्रिय, रणनीति पर काम शुरू

Sat, 23 Nov 2019 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
विज्ञापन
बीएचयू - फोटो : BHU
विज्ञापन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर उठे विवाद के लगातार तूल पकड़ने से चिंतित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी माहौल संभालने के लिए सक्रिय हो गया है। उसने इस विवाद को ठंडा करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। 

विज्ञापन


शैक्षणिक गतिविधियों से जु़ड़े संघ के समर्थकों से जहां इस मुददे पर डॉ. फिरोज की नियुक्ति के पक्ष में तर्क रखने को कहा गया है वहीं संघ के काशी प्रांत के विभाग संघ चालक डॉ. जयप्रकाश लाल से इस विवाद के विरोध में बयान जारी कराकर  यह बताने की कोशिश की गई है कि वह डॉ. फिरोज की नियुक्ति को वह पूरी तरह विधि सम्मत मानता है।

सूत्र बताते हैं कि वर्तमान परिस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस मुद्दे पर समाज में हिंदू-मुसलमानों के बीच खींचतान नहीं होने देना चाहता। संघ का पूरा ध्यान इस समय ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ पर केंद्रित है। उसका प्रयास है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से मंदिर निर्माण के लिए प्रशस्त हुए मार्ग में फिलहाल किसी प्रकार की बाधा न आने दी जाए। साथ ही सामाजिक सौहार्द्र से मंदिर निर्माण हो जाए। 
विज्ञापन


इसीलिए उसने इस मुद्दे पर फैसला आने के पहले से ही इस तरह के इंतजाम किए और माहौल बनाया कि मुस्लिमों में कोई प्रतिक्रिया न हो। दरअसल, संघ को पता है कि विवाद होने पर लंबे संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद निकले रास्ते में फिर अवरोध खड़े हो सकते हैं। इसीलिए संघ नेतृत्व कुछ भी ऐसा नहीं होने देना चाहता जिससे मुस्लिमों में नकारात्मक प्रतिक्रिया हो और माहौल खराब हो।

अनुचित व निराधार है विरोध
संघ से जुड़े भाऊराव देवरस सेवा न्यास के कार्यकारी डॉ. विजय कर्ण कहते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्पष्ट मानना है कि वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त संस्कृत साहित्य को समर्पित व श्रद्धा भाव से पढ़ाने वाले किसी भी व्यक्ति को संस्कृत पढ़ाने का अधिकार है। अगर किसी मुस्लिम ने संस्कृत का अध्ययन किया है तो उसकी सराहना होनी चाहिए। इसका विरोध पूरी तरह अनुचित है। 

संघ इससे सहमत नहीं है। वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त किसी शिक्षक का सिर्फ सांप्रदायिक आधार पर विरोध विधि के विरुद्ध और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाला है। डॉ. कर्ण तर्क देते हैं कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राच्य संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में 14 विभाग हैं। इसमें डॉ. फिरोज की नियुक्ति साहित्य विभाग में हुई है। जिसे किसी भी तरह गलत नहीं कहा जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें