मुजफ्फरनगर दंगों को भड़काने के आरोपी भारतीय जनता पार्टी के विधायक संगीत सोम का कहना है कि वे न तो भगोड़े हैं और न ही दोषी।
सरकार अपनी गलती उनके सिर मढ़ने की कोशिश कर रही है।
वे गिरफ्तारी से नहीं डरते और इसके लिए तैयार हैं लेकिन जिस तरह से स्टिंग ऑपरेशन में नाम आया है, उसके बाद पहले आजम खां को इस्तीफा देना चाहिए और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।
विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने आए संगीत सोम बुधवार को यहां विधान भवन में पार्टी के एक अन्य विधायक सुरेश राणा के साथ पत्रकारों से रू-ब-रू थे।
सोम के साथ राणा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। दोनों विधायकों ने कहा कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं। राज्य सरकार उन्हें फंसाने की साजिश कर रही है।
सोम ने कहा कि वे कहीं भागे नहीं हैं। कल तक अपने क्षेत्र में थे और आज सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने यहां आए हैं। उनके ऊपर दो आरोप लगाए गए हैं।
पहला फेसबुक पर भड़काऊ फोटो शेयर करने का और दूसरा महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने का। जहां तक फेसबुक पर फोटो शेयर करने की बात है तो यह उन्होंने नहीं किया।
उनकी आईडी से फर्जी तरीके से यह सब किया गया। यह तकनीकी मामला है और इसकी जांच करा ली जाए।
उन्होंने कहा, रही भड़काऊ भाषण की बात तो जिस 7 सितंबर की महापंचायत का हवाला दिया जा रहा है उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग निकलवा ली जाए।
साफ हो जाएगा कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा या किया है। मैं यदि दोषी हूं तो कोई भी सजा भुगतने को तैयार हूं।
सोम के मुताबिक उन्हें पता चला है कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए अरेस्ट वारंट जारी किया है।
उनसे पहले तो संसदीय कार्यमंत्री आजम खां की गिरफ्तारी होनी चाहिए क्योंकि एक न्यूज चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिये दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।
सोम ने कहा कि भाजपा ने न तो महापंचायत का आयोजन किया था और न ही भाजपा विधायक बतौर नेता उसमें गए थे। वे तो आम जनता के रूप में वहां गए थे।
सरकार ने एक संप्रदाय विशेष को खुश करने के लिए तुष्टीकरण की नीति अपनाई जिससे बहुसंख्यक समाज ने प्रतिक्रियात्मक कदम उठाया।
राणा ने कहा कि आजम खां मुजफ्फरनगर जिले के प्रभारी मंत्री हैं। उन्होंने अभी तक हिंसाग्रस्त क्षेत्र का दौरा क्यों नहीं किया।
इन दोनों विधायकों के अलावा भाजपा विधानमंडल दल के नेता हुकुम सिंह और विधायक भारतेंदु सिंह भी दंगा भड़काने के आरोपी हैं।