मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिकता माहौल को और भड़काने के आरोप में गिरफ्तार भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा को मंगलवार को एनएसए के एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष पेश किया गया।
बंद कमरे में सुनवाई के बाद दोनों विधायकों को शाम पांच बजे तक वापस भेज दिया गया था।
बोर्ड ने प्रकरण में जुटाए गए साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपियों का पक्ष सुना और फिर जिले के डीएम व एसएसपी का पक्ष जाना। हालांकि बोर्ड ने अभी कोई निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि बोर्ड के सदस्यों ने मुजफ्फरनगर के डीएम व एसएसपी से विधायकों द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान की सीडी भी तलब की थी।
बोर्ड के सदस्य वीडियो सीडी देख कर विधायकों पर लगे आरोपों का आधार समझना चाहते थे।
सूत्रों की मानें तो जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले वीडियो सीडी के बजाय ऑडियो सीडी पेश कर दी। इस पर बोर्ड ने नाराजगी जतायी, जिसके बाद अधिकारियों ने वीडियो सीडी मुहैया कराई।
मुजफ्फरनगर के एसएसपी एचएन सिंह के मुताबिक एडवाइजरी बोर्ड ने सारे साक्ष्यों का अवलोकन किया जिसमें वीडियो सीडी भी शामिल थी।
बोर्ड के समक्ष दोनों विधायकों को दोपहर करीब तीन बजे पेश किया गया। यहां से उन्हें पांच बजे से पहले ही वापस भेज दिया गया था।
एडवाइजरी बोर्ड ने 17 अक्तूबर को दोनों विधायकों को 22 अक्टूबर को पेश करने के लिए कहा था। तब बोर्ड ने जिले के डीएम व एसएसपी को इस दिन दंगे के साक्ष्य जैसे वीडियो सीडी आदि लेकर आने के निर्देश दिए थे।
एडवाइजरी बोर्ड ने सबसे पहले दोनों पक्षों को नौ अक्तूबर को इस मामले में सुनवाई पर तलब किया था।
उस दिन दोनों पक्ष पहली बार उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह, अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एसएन सहाय और न्यायमूर्ति खेमकरन के बोर्ड के सामने पेश हुए थे।
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