कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों प्रस्तुतियों से रवीन्द्रालय का मंच गुलजार हो उठा।
कथक के अलावा कथक की पूरक विद्याओं तबला, हारमोनियम, शास्त्रीय गायन और सिंथेसाइजर का शिक्षण पा रहे शिक्षार्थियों की सालाना ‘संगीत संगम’ प्रस्तुति ने दिल जीता।
शुरुआत गायन की प्रस्तुति राग तिलक कामोद-तीन ताल पर ‘नीर भरन कैसे जाऊं सखी अब...’ से हुई। स्वास्तिका मोहन, खुशबू के दल ने रंग जमाया। कैसियो जय हो..एकल वादन पर विश्रुत गुप्ता की प्रस्तुति सराही गई।
तबला तीनताल 16 मात्रा में मुखड़ा, पेशकार, कायदा, मध्यलय टुकड़ा, परन, गत चक्करदार परन में पवन चौधरी, भाव्या अग्रवाल केदल ने प्रस्तुति दी।
उस्ताद गुलशन भारती की स्वर रचना पर बोल- मिलते जुलते रहो, आते जाते रहो... नगमा-ए- जिंदगी गुनगुनाते रहो. पर स्वास्तिका मोहन ने सुर साधे। प्रतिभागियों ने हारमोनियम राग यमन पर प्रस्तुति दी।
राष्ट्रीय कथक संस्थान की ओर से हुए आयोजन में तबले पर दिनेश कुमार मिश्रा, हारमोनियम पर राशिद खां और कैसियो पर अविनाश चन्द्र ने संगत दी।