'उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य से निकलकर एक बेहतरीन तस्वीर पेश कर रहा'
उन्होंने आगे कहा, 'हम सब के लिए प्रसन्नता का विषय है कि विकसित उत्तर प्रदेश के विकसित भारत का ये जो संकल्प है निरंतर आज प्रदेश सरकार के मुखिया और एनडीए सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ रहा है। अभी संपादक जी ने उत्तर प्रदेश की प्रगति के लिए बहुत सारे विषय रखे कि कैसे आज उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ रही है, कैसे यहां पर निवेश आ रहा है और औद्योगिक विकास हो रहा है। लेकिन अर्थव्यस्था की रफ्तार आगे बढ़ती रहे इसके लिए सबसे बड़ा स्तंभ होता है स्वास्थ्य का। जब हमारे नागरिक स्वस्थ होंगे तभी वो अर्थव्यवस्था में अपना भरपूर योगदान कर सकेंगे। इसलिए विकसित भारत की हम बात करते है तो एक स्वस्थ भारत एक बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ हो जाता है। उत्तर प्रदेश के संबंध में भी स्वस्थ उत्तर प्रदेश से विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण संभव होगा। सबसे जरूरी बात है कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य से निकलकर एक बेहतरीन तस्वीर पेश कर रहा है।'
'स्वास्थ्य पर लगातार सरकार का बजट बढ़ रहा'
उन्होंने कहा, 'भारत की सरकार ने स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज और ये आप कई जगह पढ़ते और सुनते होंगे। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज मतलब देश के एक-एक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्ता युक्त स्वास्थय सेवा सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित हैं। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की बात कोई नई भी नहीं है। हम वर्षों से सुन रहे हैं लेकिन सही मायनों में इसे धरातल पर उतारने का काम हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किया है। आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक है और इतनी बड़ी जनसंख्या में हर नागरिक के पास एक्सेसिबल, अफोर्डेबल और क्वालिटी हेल्थ केयर हो, यह सामान्य लक्ष्य नहीं है, ये एक बहुत बड़ा लक्ष्य है। कल्पना कीजिए इतने सारे लोगों तक पहुंचना। लेकिन हमने तय किया है कि हम इसे करके दिखाएंगे तो इसके लिए बहुत सारे प्रयास हो रहे हैं। स्वास्थ्य पर लगातार सरकार का बजट बढ़ रहा है, उत्तर प्रदेश सरकार का भी और हम प्रिवेंटिव हेल्थ केयर पर ध्यान दे रहे हैं।'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 'पहले हमारी जो स्वास्थ्य को लेकर अप्रोच थी वो क्यूरेटिव हेल्थ केयर तक सीमित थी, यानि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो हम इलाज के जरिए उसे ठीक कर दें। आज हमने अपने दृष्टिकोण में बदलाव किया है कि हम प्रिवेंशन की ओर ध्यान देंगे और इसलिए जब आप देखते हैं कि देश के अंदर हमने 1,82,000 से ज्यादा आरोग्य मंदिर जो हमारे प्राइमरी हेल्थ केयर सुविधा है जो फस्ट प्वाइंट ऑफ कॉन्टेक्ट है वहां पर हर नागरिक की हम स्क्रीनिंग कर रहे हैं। क्योंकि हम बीमारियों की अतिशीघ्र पहचान करना चाहते हैं और यह प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। इसके साथ ही लगातार देश के अंदर हमारे अस्पताल बेहतर हों, अस्पतालों की सुविधाओं में जो गेप्स इतने वर्षों तक रहे हैं उनको फिक्सअप करने के लिए हमने प्रधानमंत्री अभीम जैसी आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को प्रारंभ किया और स्वास्थ्य के बुनियादी ढाचे का तेजी से विस्तार किया।'
उन्होंने कहा, 'आज केवल नए हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन ही नहीं बन रहे हैं। नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं, नए नर्सिंग कॉलेज बन रहे हैं। नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बन रहे हैं। नए सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक्स बनाए जा रहे हैं। और इन सब कामों ने तेज रफ्तार पकड़ी है और उत्तर प्रदेश के अंदर हमने कई सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक्स बनाए है। दो एम्स रायबरेली का एम्स था और गोरखपुर में भी एम्स का निर्माण हुआ। हर जिले में एक मेडीकल कॉलेज हो इस विचार को हमने यूपी में भी आगे बढ़ाया। तो एक तरफ जहां हेल्थ का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, मेडिकल का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर हम लगातार अपनी मैन पावर को कैसे बढ़ाएं? इसके बारे में भी सरकार ने विचार किया है। क्योंकि देश में डॉक्टर पॉपुलेशन रेसो और डॉक्टर पेशेंट रेसो ये कैसे हमारा सुधरे ये कैसे बेहतर हो। देश में जो लगातार हम सुनते रहते हैं कि गांव में डॉक्टर नहीं है, अस्पताल में स्पेशलिस्ट नहीं है या नर्सिंग स्टाफ नहीं है। यह स्थिति लगातार बनी नहीं रह सकती। इसे ठीक करने के लिए कुछ न कुछ करना होगा। तो इसके लिए जो नए इंस्ट्रीट्यूशन हमारे बन रहे हैं वो आने वाले समय में हमारे पास एक नया पूल ऑफ डॉक्टर्स होगा, बड़ी संख्या में स्पेशलिस्ट होंगे, नर्सिंग स्टाफ होगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'आपने बजट में घोषणा सुनी थी एलाइड हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स हम बना रहे हैं। मल्टी स्किल्ड केयर गिवर्स की हम फौज खड़ी कर रही है। ताकि हमारी जो बुजुर्ग आबादी है जो 2050 तक 35 करोड़ के लगभग हो जाएगी उनकी आवश्यकता का ध्यान रखा जा सकते। मेन पावर तैयार हो इसके प्रयास भी सरकार ने किए हैं। इसके साथ ही लगातार हमारी कोशिश है कि जो गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर जनता है उसके लिए इलाज की बेहतर व्यवस्थाएं हो। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजन के दायरे में देश की बड़ी आबादी है। 62 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत पीएम जय के दायरे में ला चुके हें। इसमें हमारी जो सबसे गरीब 40 प्रतिशत आबादी है वह भी शामिल है, इसमें 70 वर्षीय और उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग भी शामिल हैं। गिर वर्कर्स, फ्रंट लाइन हेल्थ के वर्कर भी शामिल हैं। सरकार निरंतर प्रयास कर रही हैं। इन सबके प्रयासों के बीच यह भी जरूरी है कि हम टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करें। हेल्थ केयर में हमने टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ई-संजीवनी है। जब कोरोना का संकट देश में आया। लोग घरों में कैद थे। उस दौरान हमने ई संजीवनी लॉन्च किया था। आज करोड़ों लोग घरों में बैठकर डॉक्टर्स से परामर्श ले रहे हैं।'