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Samwad 2025: अमर उजाला के 77 वर्षों के सफर को सीएम योगी ने सराहा, अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति योजना की तारीफ की

Thu, 17 Apr 2025 03:00 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Amar Ujala Samwad Lucknow 2025: अमर उजाला संवाद में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र के एक सशक्त स्तंभ के रूप में शानदार 77 वर्षों की इस यात्रा के लिए अमर उजाला परिवार को हृदय से बधाई। लोकतंत्र की सशक्त आवाज है संवाद, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है संवाद। कठिन से कठिन समस्या का समाधान का सशक्त माध्यम है संवाद। जहां संवाद बाधित होता है वहीं से संघर्ष के रास्ते प्रारंभ होते हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आगाज हो चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। अमर उजाला के इस वैचारिक संवाद कार्यक्रम में कला, मनोरंजन, शिक्षा, राजनीति, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी देश की जानी मानी शख्सियत, विचारक और विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। सीएम ने कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की। मुख्यमंत्री ने अमर उजाला को लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ के रूप में शानदार 77 वर्षों की यात्रा के लिए बधाई दी। अमर उजाला परिवार के प्रबंध निदेशक तन्मय महेश्वरी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह इस कार्यक्रम के जरिये लोकतंत्र को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। 

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सीएम योगी ने कहा, 'लोकतंत्र के एक सशक्त स्तंभ के रूप में शानदार 77 वर्षों की इस यात्रा के लिए अमर उजाला परिवार को मैं हृदय से बधाई देता हूं। लोकतंत्र की सशक्त आवाज है संवाद, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है संवाद। कठिन से कठिन समस्या का समाधान का सशक्त माध्यम है संवाद। जहां संवाद बाधित होता है वहीं से संघर्ष के रास्ते प्रारंभ होते हैं। भारत का लोकतंत्र इतना सश्क्त है इसने अपने सभी स्तंभों के लिए लक्ष्मण रेखाएं भी तय की हैं, विधायिका को क्या करना है, कार्यपालिका की सीमाएं क्या हैं और न्याय पालिका की रचनात्मक भूमिका कैसे आगे बढ़ सकती है। वहीं, मीडिया भी किस रूप में अपनी जीवंत उपस्थिति के माध्यम से एक आम नागरिक को अपने साथ जोड़ सकता है। ये चारों स्तंभ अपनी लक्ष्मण रेखा का पालन करते हुए जब भी कार्य करेंगे तो वो लोकतंत्र को और भी पुष्ट करेंगे। लोकतंत्र उतना ही आगे फलेगा-फूलेगा और अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज को उतना ही मजबूती के साथ हर स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।'

सीएम ने कहा, 'शासन की सभी प्रणालियों में लोकतंत्र को सबसे अच्छा इसलिए भी माना गया है। क्योंकि हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के एक समान अधिकार के साथ जीने की पूरी स्वतंत्रता होती है। अगर हमें स्वतंत्रता मिली है अधिकार मिले हैं, तो उस अधिकार की सुरक्षा के लिए अवश्यक है कि हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन उसी इमानदारी के साथ करें। हमेशा से कर्तव्य और अधिकारों के बीच द्धंद रहा है कि कौन भारी है और कौन ज्यादा ताकतवर है। अगर कर्तव्यों से जरा सा भी हटे तो सामने अस्तित्व का संकट खड़ा होगा।'
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सीएम ने कहा कि अमर उजाला परिवार ने संवाद का कार्यक्रम लखनऊ में किया, जो एतिहासिक और पौराणिक परंपरा से जुड़ा है। पूरे उत्तर प्रदेश का केंद्र बिंदु लखनऊ है। संवाद का ये कार्यक्रम प्रदेश के 25 करोड़ लोगों तक न केवल पहुंचेगा बल्कि 25 करोड़ लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व भी करेगा। सीएम ने कहा कि जो भी मंच पर आएगा, अपने विवेक से अपनी बात कहेगा। कोई बढ़ा चढ़ा कर भी अपनी बात पेश कर करेगा। इसे मापने का सबसे अच्छा पैमाना है कि देश के अंदर आपके प्रति पहले क्या धारणा थी और आज क्या है। 

सीएम योगी ने कहा, 'आज के इस संवाद कार्यक्रम पर मैं कहूंगा कि अमर उजाला एक शानदार यात्रा के साथ आगे बढ़ा हैं। 77 वर्षों की इस यात्रा को आगे कैसे लेकर चलना है, आजादी के एक वर्ष के बाद  1948 में अमर उजाला प्रकाशित होता है। 1948 से लेकर 2025 तक यह 77 वर्ष की यात्रा आज आपकी पूरी हो रही है। स्वभाविक रूप से आपने भी प्रधानमंत्री जी के संकल्प के साथ अपने आप को जोड़ा हुआ है। 2047 में यह देश अपना शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा। 1947 का भारत कैसा होगा और 2048 में मीडिया की भूमिका क्या होगी। यह बात अमर उजाला के पाठकों को बतानी होगी कि कैसे 100 वर्षों के इस सफर में उन्होंने अपनी विकास यात्रा को कैसे अंजाम दिया। समग्र विकास में नौजवानों के लिए, अन्नदाता किसानों के लिए, श्रमिकों के लिए और समाज के अलग-अलग तबकों के लिए किस भूमिका के साथ हमने अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। अनेक रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ अमर उजाला परिवार कार्य करता है। यहां पर अतुल माहेश्वरी जी के नाम पर स्कॉलरशिप के कार्यक्रम चलते हैं। मेधावी छात्रों से संबधित कई कार्यक्रमों में मैंने भी हिस्सा लिया है। दिव्यांगों के लिए भी यह कई कार्यक्रम चलाते हैं। अन्य अनेक रचनात्मक कार्यक्रम होते हैं।'
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