Samsung object on mobile tender in Nagar Nigam
लखनऊ। नगर निगम में सात हजार मोबाइल खरीद का टेंडर विवाद में फंस गया है। एक बड़ी मोबाइल कंपनी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि एक ही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ये शर्तें तय की गई हैं। इसे लेकर कंपनी ने प्रमुख सचिव नगर विकास से भी शिकायत की है। इसमें शर्तों में बदलाव करते हुए नए सिरे से टेंडर जारी करने की मांग की गई है।
सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए नगर निगम कार्यदायी संस्था से तैनात कर्मचारियों को स्मार्ट मोबाइल फोन देेगा। इससे हाजिरी जांचने के साथ उनकी कार्यस्थल पर मौजूदगी का पता लगाया जा सकेेगा। निगम के कंट्रोल रूम और लखनऊ 311 एप पर आने वाली शिकायतों को भी संबंधित क्षेत्र के सफाईकर्मियों को भेजा जाएगा। इसे लेकर नगर निगम की ओर से सात हजार मोबाइल खरीदने का टेंडर बीते माह जारी किया गया था। इसमें अन्य शर्तों के साथ टेंडर डालने वाले कंपनी का वुलनिरेबिलिटी असेसमेंट एंड पेनेट्रेशन टेस्टिंग (वीएपीटी) प्रमाणित होना भी आवश्यक है। इस पर सैमसंग ने सवाल उठाया है कि इस शर्त के कारण सिर्फ एक ही कंपनी टेंडर में भाग ले सकती है। देेेेश में एक ही कंपनी वीएपीटी प्रमाणित है। इससे प्रतिस्पर्धा नहीं होगी।
जानिए क्या है वीएपीटी
वीएपीटी मोबाइल डाटा को हैकर से सुरक्षित रखने का सिस्टम है। इसका प्रावधान टेंडर में भी शामिल है। जानकारों का मानना है कि वीएपीटी के समान मोबाइल डाटा सुरक्षित रखने के लिए कई और सिस्टम भी है। इसमें आईएसओ 2700 भी शामिल है, लेकिन टेंडर में वीएपीटी अनिवार्य किए जाने के कारण उसी तरह के अन्य प्रमाणपत्र रखने वाली कंपनियां टेंडर में शामिल नहीं हो सकती।
भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी का कहना है कि सिर्फ उन्हीं चीनी कंपनियों से किसी तरह का सामान लेने की अनुमति है, जिन्हें केंद्र सरकार की ओर अनुमति दी गई है। इसे लेकर ही टेंडर में प्रावधान किया गया है, ताकि मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिले।
अभी खुली है टेक्निकल बिड
जानकारों ने बताया कि मोबाइल खरीद के लिए टेक्निकल बिड खुुली है। इसमें तीन टेंडर आए हैं। टेक्निकल बिड पर निर्णय होने के बाद फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी, लेकिन कम टेंडर आने के चलते निगम प्रशासन टेंडर को फिर से जारी करने पर विचार कर रहा है। इसे लेकर जल्द आदेश जारी हो सकता है। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने कहा कि किसी कंपनी को यदि शर्तों से कोई आपत्ति है तो उसके लिए वह जेम पोर्टल पर सीधे आपत्ति कर सकती थी। उस पर विकल्प है। इसके अलावा नगर निगम में भी आपत्ति दे सकती थी। यदि किसी कंपनी की कोई आपत्ति है तो उसे देखा जाएगा।