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वित्तीय अनियमितताओं, लापरवाही और अनुशासनहीनता में समाज कल्याण निदेशक से जवाब-तलब

Wed, 10 Feb 2021 01:44 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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उत्तर प्रदेश शासन ने वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही में निदेशक, समाज कल्याण बाल कृष्ण त्रिपाठी से जवाब-तलब किया है। प्रमुख सचिव, समाज कल्याण बीएल मीणा ने निदेशक से 16 गंभीर आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है। संबंधित पत्र में कहा गया है कि निदेशक का आचरण कर्मचारी नियमावली के खिलाफ है।

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पत्र में घोर अनुशासनहीनता और निर्देशों के अवहेलना की बात भी कही गई है। उधर, इस बारे में संपर्क किए जाने पर निदेशक, समाज कल्याण बाल कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि अभी वह बीमार हैं। ठीक होने पर ही इस बारे में अपना स्पष्टीकरण दे सकेंगे।

बीएल मीणा की ओर से निदेशक को स्पष्टीकरण के लिए 10 पन्नों का पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि निदेशक ने हाईकोर्ट में विचाराधीन एक मामले में समय से प्रति शपथपत्र नहीं लगाया। इससे असहज स्थिति उत्पन्न हुई। अंतर्विभागीय परामर्श से संबंधित सभी मामले ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, सभी पत्रावलियां ऑफ लाइन प्रस्तुत की जा रही हैं। इस संबंध में जब उनसे पूर्व में स्पष्टीकरण मांगा गया तो उसे भी नहीं दिया।
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यह कृत्य सरकारी आचरण नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसी तरह से भारत सरकार को एनजीओ संबंधी सभी प्रस्ताव ऑफलाइन भेजे गए, जबकि प्रस्ताव ऑनलाइन ही भेजे जाने के निर्देश हैं।

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आदेश के बावजूद नहीं सुधारा गया है

पत्र में कहा गया है कि अति पिछड़े अनुसूचित जाति समूह बहुल गांवों में सर्वांगीण विकास के लिए संचालित एकीकृत विकास योजना के तहत जारी स्वीकृति संबंधी शासनादेश में खामियां थीं, आदेश के बावजूद इन्हें नहीं सुधारा गया।

इस प्रकरण में विभिन्न जिलों के 50 विकास कार्यों के लिए दूसरी किस्त के रूप में 12 करोड़ 37 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गईं। पत्र के अनुसार, इस वित्तीय अनियमितता संबंधी प्रकरण में निदेशक की भूमिका संदिग्ध मालूम होती है।

मीणा ने आगे लिखा है कि उनके कक्ष में महिला एवं बाल विकास संयुक्त समिति से संबंधित तैयारी बैठक में उठाए गए बिंदुओं पर निदेशक ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उत्तर मांगने पर विभागीय अधिकारियों को साथ लेकर निदेशक कक्ष से बाहर चले गए। बाद में मीडिया के सामने प्रमुख सचिव के खिलाफ बयानबाजी और नारेबाजी कराई गई, जिससे विभाग एवं शासन की छवि धूमिल हुई। इसे शासकीय नियमों और सरकारी आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन बताया गया है।
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