विधानसभा के 18वें उपाध्यक्ष के लिए 18 अक्तूबर को विधानसभा में चुनाव होगा। मंगलवार को विधानसभा सचिवालय में अधिकारियों की बैठक में चुनाव प्रक्रिया को लेकर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक बैठक में उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बाकायदा चुनाव कार्यक्रम जारी करने पर सहमति बनी है। इसमें नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी व चुनाव की स्थिति में मतदान व मतगणना का शेड्यूल तय होगा।
विपक्ष का विरोध हुआ तो कराना पड़ेगा चुनाव
विधानसभा उपाध्यक्ष का पद परंपरा के अनुसार विपक्ष के हिस्से का माना जाता है लेकिन भाजपा की ओर से जिस तरह सपा विधायक नितिन अग्रवाल का नाम चर्चा में आया है, सपा उस पर अपनी सहमति देगी, इसमें संशय है। ऐसे में चुनाव को लेकर विपक्ष की भूमिका अहम होगी। विश्लेषकों का कहना है कि सदन में सत्ताधारी दल का दो तिहाई बहुमत होने से विपक्ष नितिन की जीत सुनिश्चित मानकर सत्र का बहिष्कार भी कर सकता है। पूर्व में विशेष सत्र का विपक्ष बहिष्कार कर चुका है। ऐसे में नितिन निर्विरोध हो सकते हैं। लेकिन यदि विपक्ष विरोध की रणनीति पर आगे बढ़ा तो चुनाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में विधानसभा के अंदर चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकार चाहे जिसे बनाए
बसपा विधानमंडल दल के नेता शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने कहा कि उन्हें विधानसभा का सत्र आहूत किए जाने की सूचना प्राप्त हुई है, लेकिन एजेंडा नहीं मिला है। विधानसभा उपाध्यक्ष सरकार का विषय है, सरकार जिसे चाहे बनाए।