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दलित व पिछड़ों को मिलने वाले अधिकार छीनना संघ का मकसद: सपा प्रदेश अध्यक्ष

Wed, 25 Jan 2017 02:41 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
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नरेश उत्तम
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सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम कांग्रेस से गठबंधन को लेकर बेहद उत्साहित हैं। दावा करते हैं कि गठबंधन से 300 से ज्यादा सीटें आएंगी। उत्तम न भाजपा को चुनौती मानते हैं, न ही बसपा को।
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उन्हें भरोसा है कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के आशीर्वाद और अखिलेश सरकार के कामों के आगे विपक्षी कहीं नहीं टिकेंगे। उन्होंने गठबंधन में कांग्रेस को दी गई 105 सीटों के नाम अभी तक सार्वजनिक न किए जाने की वजह भी बताई। पेश है अजीत बिसारिया से उनकी बातचीत के अंश...

सवाल-- कहा जा रहा है कि सपा ने टिकट बांटने में देरी कर दी। प्रत्याशियों को प्रचार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा ?

जवाब-- बूथ स्तर पर हमारी इकाइयां हैं, जो लगातार पांच साल में अखिलेश सरकार के कामों को लोगों के बीच ले जा रही हैं। चुनाव की तैयारी हम छह महीने से कर रहे हैं। हमें प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिला है।
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...इसलिए नहीं घोषित हो पाई कांग्रेस की सीटें

अखिलेश यादव व नरेश उत्तम
सवाल-- कांग्रेस से गठबंधन हो चुका है, पर अभी तक यह साफ नहीं है कि कौन सी 105 सीटें कांग्रेस को दी गई हैं?

जवाब-- दरअसल, गठबंधन की घोषणा से पहले ही हमनें कांग्रेस को दी गई तमाम सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए थे। अधिकतर प्रत्याशियों को पार्टी सिम्बल भी दे दिए थे। उनसे सिम्बल वापस लिए बिना सीटों की घोषणा कर दी तो दिक्कत हो सकती है। इसलिए ही गठबंधन के तहत कांग्रेस को दी गई सीटों की जानकारी मीडिया को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। हालांकि, ये सीटें कांग्रेस और सपा की साझी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने से पहले ही तय हो चुकी हैं।

सवाल-- टिकट वितरण को लेकर पार्टी में काफी असंतोष है। कई मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों को ही टिकट नहीं दिया गया। आपको नहीं लगता इससे पार्टी के विजय रथ को खतरा हो सकता है?

जवाब-- देखिए, जिसका टिकट कटता है, उसे अफसोस तो होता है। लेकिन, सपा में अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। दावेदार धरना-प्रदर्शन के माध्यम से भी अपना विरोध जताते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि वे पार्टी विरोधी हो गए हैं। चुनाव में वे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को ही लड़ाएंगे। रही बात मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के टिकट कटने की तो यह निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। जवाब भी वही दे सकते हैं।

इतनी सीटों पर गठबंधन को मिलेगी सफलता

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व प्रियंका वाड्रा - फोटो : amar ujala
सवाल-- गठबंधन को कितने सीटें मिलेंगी?

जवाब-- हम जनता के बीच यही कह हैं कि सभी 403 सीटें जीतेंगे। (हंसते हुए) आपके सामने तो हकीकत ही स्वीकार करनी पड़ेगी। सपा-कांग्रेस गठबंधन 300+ रहेगा।

सवाल-- यही दावा तो भाजपा भी कर रही है, किसके दावे पर यकीन करें?

जवाब-- लोकतंत्र में किसी के बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन हमारे पास 300+ का दावा करने का पुख्ता आधार है। वह आधार है-सपा सरकार के पांच साल के विकास कार्य। किस क्षेत्र में अखिलेश सरकार ने काम नहीं किया। विश्वस्तरीय सड़कें दीं, आने-जाने के लिए पुल दिए, 24 घंटे बिजली दे रहे हैं, सिंचाई और दवा मुफ्त की। अगली बार सरकार बनने पर गरीबों को पेंशन, हर बच्चे को स्कूल में केंद्रीयकृत रसोई से खाना, युवाओं को स्मार्ट फोन, पर्याप्त रोजगार....देने की घोषणा भी  की है। सभी जानते हैं कि हम जो कहते हैं, वो करते हैं। इसलिए दुबारा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे।

जनसभाओं में जाएंगे मुलायम

मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
सवाल-- सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव भी आपके साथ नहीं आ रहे हैं। घोषणापत्र जारी करने के अवसर पर भी नहीं आए। क्या इससे गलत संदेश नहीं जाएगा?

जवाब-- नेताजी का पूरा आशीर्वाद अखिलेश यादव और पार्टी के साथ है। देखते रहिए, वे जनसभाओं में भी जाएंगे और लोगों से सपा को भारी बहुमत दिलाने की अपील भी करेंगे।
 
सवाल-- अम्बिका चौधरी के बसपा में जाने से जनाधार खिसकने की आशंका जताई जा रही है?

जवाब-- अम्बिका चौधरी से ज्यादा बड़ा और पुराना नेता मैं हूं। 40 वर्षों से नेताजी के साथ हूं। दावे के साथ कह रहा हूं कि सपा-कांग्रेस गठबंधन ही पूर्ण बहुमत की फिर सरकार बनाएगा। अम्बिका जैसे नेताओं के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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संघ परिवार या भाजपा हमारे लिए कोई चुनौती नहीं

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सवाल-- संघ परिवार और बसपा से मिल रही चुनौतियों से कैसे निपटेंगे?

जवाब-- संघ नेताओं के हाल के बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि वे आरक्षण के विरोधी हैं। दलितों व पिछड़ों को मिले संविधान प्रदत्त अधिकार को छीनना चाहते हैं। इसलिए संघ परिवार या भाजपा हमारे लिए कोई चुनौती नहीं है। वहीं, दलितों ने पिछले पांच साल के अखिलेश सरकार के कामों को देख लिया है कि यह सरकार बिना भेदभाव के सभी को विकास का मौका देती है।
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