सूत्रों का कहना है कि जिला पंचायत सदस्य पद के लिए कश्यप, केवट, निषाद, लोहार, चौरसिया, बियार, नोनिया आदि जातियों के मजबूत दावेदार सामने आते हैं तो पार्टी उन्हें वरीयता देगी। इसी तरह अनुसूचित जाति के मजबूत उम्मीदवारों को भी चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है।
पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि इन जातियों के लोगों की पार्टी की तरफ से पंचायत चुनाव में हिस्सेदारी से सकारात्मक संदेश जाएगा। उनके जरिए संबंधित जाति के बीच पार्टी अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो सकेगी।
फीडबैक के आधार पर बनी रणनीति
सपा हाईकमान को विभिन्न स्तरों से मिले फीडबैक में यह बात सामने आई है कि कई अति पिछड़े व अनुसूचित जाति के लोग पार्टी से जुड़ना चाहते हैं, लेकिन उनका भरोसा डगमगाता रहता है। उन्हें आशंका रहती है कि कहीं यादव व मुसलमान के कारण उनकी हिस्सेदारी कम न हो जाए। अब पार्टी हाईकमान आधार वोट बैंक के साथ ही दूसरी जातियों को हर हाल में अपने साथ लेकर चलने की तैयारी कर रही है।
सपा हाईकमान को विभिन्न स्तरों से मिले फीडबैक में यह बात सामने आई है कि कई अति पिछड़े व अनुसूचित जाति के लोग पार्टी से जुड़ना चाहते हैं, लेकिन उनका भरोसा डगमगाता रहता है। उन्हें आशंका रहती है कि कहीं यादव व मुसलमान के कारण उनकी हिस्सेदारी कम न हो जाए। अब पार्टी हाईकमान आधार वोट बैंक के साथ ही दूसरी जातियों को हर हाल में अपने साथ लेकर चलने की तैयारी कर रही है।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि सपा हमेशा हर वर्ग को साथ लेकर चली है। पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव में हर जाति को तवज्जो मिलेगी। अति पिछड़ों व अनुसूचित जाति को उनका हक सपा ही दिला सकती है। अल्पसंख्यकों के हक के लिए पार्टी ने निरंतर संघर्ष किया है। पंचायत चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं होता है। ऐसे में विभिन्न इलाके से हर वर्ग के उम्मीद्वारों का पार्टी के कार्यकर्ता समर्थन करेंगे।