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Mission Election : मिशन कांशीराम के जरिए सियासी समीकरण साधने की तैयारी में समाजवादी पार्टी, मकसद है 2024 फतह

Wed, 05 Apr 2023 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, लखनऊ

सार

इसका स्वरूप सामाजिक आंदोलन का होगा, लेकिन मकसद 2024 फतह है। इस आंदोलन को मिशन कांशीराम नाम दिया गया है।
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी मिशन कांशीराम के जरिए सियासी समीकरण साधने की तैयारी में है। इसका स्वरूप सामाजिक आंदोलन का होगा, लेकिन मकसद 2024 फतह है। इस आंदोलन को मिशन कांशीराम नाम दिया गया है। इसका संचालन कांशीराम की प्रयोगशाला से निकलने वाले नेता करेंगे। वे विभिन्न जिलों में दलित आबादी के बीच जाएंगे। दलितों और अति पिछड़ों को संविधान पर खतरा मंडराता बताएंगे। उन्हें जातीय जनगणना की जरूरत और कांशीराम के विभिन्न अवसरों पर दिए गए संदेश से वाकिफ कराएंगे। इसकी शुरुआत रायबरेली में कांशीराम की प्रतिमा अनावरण समारोह से हो गई है।

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रायबरेली में आयोजित कांशीराम प्रतिमा अनावरण समारोह में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सधे अंदाज में बार-बार सामाजिक आंदोलन की जरूरत बताई। क्योंकि उन्हें पता है कि कांशीराम ने अपना मिशन सामाजिक आंदोलन के जरिए आगे बढ़ाया था। इतना ही नहीं उन्होंने इटावा से कांशीराम को लोकसभा में भेजने का जिक्र अनायास ही नहीं किया, बल्कि इसके पीछे सियासी निहितार्थ हैं।

उन्होंने जताया कि समाजवादियों ने उन्हें पहले लोकसभा में भेजा और अब उनके सम्मान में प्रतिमा लगवा रहे हैं। आगे उनके सपनों को पूरा करने की बारी है। इसके लिए नए सामाजिक आंदोलन की जरूरत है। इस आंदोलन को कांशीराम की प्रयोगशाला से निकलने वाले नेता ही चला सकते हैं। ये सभी नेता अब समाजवादी पार्टी में हैं। उनका यह कहना कि सामाजिक न्याय के आंदोलन को समाजिक परिवर्तन के पड़ाव से आगे ले जाकर हर गरीब, दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक को उसके हक की मंजिल तक पहुंचाना है, यही हमारा लक्ष्य है।
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इस वक्तव्य के भी सियासी मायने हैं। इसे उनकी सामाजिक न्याय की लड़ाई को आंदोलन का नाम देकर वोटबैंक की लामबंदी के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह रामचरित मानस और शूद्र पर बहस शुरू कर सुर्खियों में आए सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य भी सामाजिक आंदोलन की दुहाई दे रहे हैं। स्वामी की तरह ही इंद्रजीत सरोज, रामअचल राजभर सहित अन्य नेताओं ने भी सामाजिक आंदोलन की दुहाई दी। वे बसपा प्रमुख मायावती पर मिशन कांशीराम से भटकने के आरोप लगाकर दलितों के बीच संदेश देने का प्रयास किए।

उनहोंने एलान किया कि रायबरेली से शुरू हुआ मिशन कांशीराम अब थमने वाला नहीं है। साफ है कि समाजवादी पार्टी दलित वोटबैंक को हर हाल में अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटी है। इसके लिए कांशीराम जयंती बनाने से लेकर संगठन में भागीदारी बढ़ाने तक की पहल की गई है। पार्टी की रणनीति है कि विधानसभा चुनाव में मिले 35 फीसदी वोटबैंक में पांच से सात फीसदी अतिरिक्त वोट जुड़ जाए तो बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2024 फतह के लिए दलितों एवं अति पिछड़ों के बीच मिशन कांशीराम निरंतर चलाता रहेगा। यह एक तरह का सामाजिक आंदोलन होगा। इसमें लोगों को एकजुट किया जाएगा। उन्हें समझाया जाएगा कि अब कांशीराम का मिशन समाजवादी पार्टी ही पूरा कर सकती है। इस काम बाबा साहब वाहिनी के अलावा बसपा पृष्ठभूमि से सपा में आए वरिष्ठ नेता करेंगे। वे एक तरह से बसपा पर मिशन कांशीराम से भटकने और भाजपा से सामाजिक खतरा बताएंगे। यह भी समझाएंगे कि मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के उद्देश्य को अखिलेश यादव पूरा करने के लिए संकल्पित हैं। इसी रणनीति के तहत सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य आठ अप्रैल को प्रतापगढ़ में सामाजिक रैली करने जा रहे हैं। इसी तरह इंद्रजीत सरोज, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर भी अलग- अलग इलाके की जिम्मेदारी संभालेंगे।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मान्यवर कांशीराम का मिशन ही दलितों, पिछड़ों को हक दिला सकता है। अब सपा में रहते हुए उनके मिशन को आगे बढाया जाएगा। वह पूरे प्रदेश में आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं। अप्रैल में हर दिन किसी न किसी जिले में कार्यक्रम लगा हुआ है। उन्होंने जोड़ा कि संविधान बचाने के लिए अन्य कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

इन मुद्दों पर चलेगा आंदोलन
सूत्रों का कहना है कि सपा नेताओं की ओर से चलने वाले मिशन कांशीराम में भाजपा सरकार पर दलितों, पिछड़ों एवं आदिवासियों के आरक्षण खत्म करने, संविधान के साथ खिड़वाड़ करने के आरोप लगाए जाएंगे। यह भी समझाया जाएगा कि जातीय जनगणना की जरूरत क्यों हैं? सरकार इससे पीछे हट रही है, इसकी भी वजह बताई जाएगी। इस तरह दलितों को सपा से जोड़ने की भरसक कोशिश की जाएगी। जनसभाओं में कांशीराम के विभिन्न अवसर पर दिए गए भाषणों को संक्षेप में सुनाया जाएगा। समता एवं स्वाभिमान की दुहाई दी जाएगी। जिस गांव में दलितों के साथ अत्याचार होगा, उसके आसपास अनिवार्य रूप से सभा होगी। इन सभाओं में क्षेत्र के पढ़े- लिखे, सेवानिवृत्त लोगों को जरूरत बुलाया जाएगा। संगठित होने की जरूरत क्यों है? समाज के विकास के लिए सत्ता की जरूरत क्यों है, इसे भी बताया जाएगा।

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