यूपी में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को वक्फ संपत्तियों से होने वाला आमदनी उसके खर्च से काफी कम है। ऐसे में कर्मचारियों के 41 महीनों का वेतन बकाया हो गया था। हालांकि 14 दिन के कार्य बहिष्कार के बाद सितंबर में उनको तीन महीने का वेतन दिया गया। यही नहीं, वेतन मद में सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान भी सात साल से विभाग को नहीं मिला है। इससे बोर्ड को अपना खर्च भी चलाना मुश्किल हो गया है।
सरकार इसके लिए अनुदान भी देती है ताकि विभाग को कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्च में समस्या न हो। हालांकि सरकार ने विभाग को वर्ष 2017 से वेतन मद में अनुदान नहीं दिया है। नतीजतन आमदनी कम और खर्च ज्यादा होने से कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन का भुगतान नहीं किया गया। फिलहाल 38 महीने का वेतन बकाया है।
गौरतलब है कि वर्तमान में बोर्ड में 14 कर्मचारी हैं। इन पर वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा व देखरेख की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों के वेतन व अन्य मद में सालाना 1.20 करोड़ रुपये खर्च होता है। बोर्ड को वक्फ संपत्तियों से सालाना औसत आय 64.20 लाख रुपये है। मौजूदा समय में बोर्ड लगभग 2,70,89,800 रुपये के घाटे में चल रहा है।
शिया वक्फ बोर्ड को कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान और अन्य घाटे को खत्म करने के लिए 3,35,09,800 रुपये की जरूरत है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजीज अहमद ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को अक्तूबर में पत्र लिखा था।
वहीं, बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी का कहना है कि कर्मचारियों के 36 महीने का वेतन पिछले बोर्ड के कार्यकाल का बकाया है। उनके कार्यकाल में मात्र पांच महीने का वेतन बकाया था, जिसमें से तीन महीने के वेतन का भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि वेतन के भुगतान की समस्या का समाधान तभी हो सकता है, जब सरकार वेतन मद में अनुदान जारी करे और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए ताकि संपत्तियों से मुतालबा वसूल किया जा सके।