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अयोध्या मामले पर संत-धर्माचार्यों ने कहा- समझौते की गुंजाइश नहीं, सुप्रीम कोर्ट दे निर्णय

Wed, 06 Mar 2019 08:30 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बहुप्रतीक्षित अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर मध्यस्थता का सुझाव देते हुए कहा है कि हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं। हमारी चिंता केवल विवाद सुलझाने की है। बेहतर होगा कि आपसी बातचीत से मसला हल हो। अब सवाल यह है कि कैसे? हिंदू पक्ष जहां मध्यस्थता को लेकर एकमत नहीं है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता का स्वरूप तय करने की मांग की है। 
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मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यदि कोर्ट मध्यस्थता करे तो हम बातचीत को तैयार हैं। दूसरी तरफ निर्मोही अखाड़ा ने जहां मध्यस्थता की वकालत की है वहीं विहिप सहित रामलला के सखा ने स्पष्ट किया है कि अयोध्या में राममंदिर पर कोई समझौता नहीं होगा। जबकि रामजन्मभूमि न्यास से जुड़े संत-धर्माचार्यों ने भी अब सुलह-समझौते की किसी गुंजाइश से इनकार करते हुए कहा है कि सुलह-समझौते के कई प्रयास हो चुके हैं, अब सुप्रीम कोर्ट को शीघ्र निर्णय देना चाहिए। 

मध्यस्थता के लिए हो विशेष व्यक्ति की नियुक्ति: धर्मदास 

हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता करानी चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री या किसी विशेष व्यक्ति की नियुक्ति की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट स्वयं भी मध्यस्थता करे तो अच्छा है। मध्यस्थ पहले अयोध्या आकर जमीनी हकीकत देखे। हम राममंदिर निर्माण जल्द से जल्द चाहते हैं, मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख संतोषजनक नहीं है। 

पहले तय हो मध्यस्थता का स्वरूप: हाजी इकबाल
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि पहले मध्यस्थता का स्वरूप तय होना चाहिए। मध्यस्थता कैसे होगी, कौन करेगा पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है। हम तो बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन दूसरा पक्ष बातचीत नहीं करना चाहता। वह कहता है कि वह समझौता नहीं करेगा। यदि एक पक्ष नहीं चाहता है तो हम अदालत का निर्णय मानेंगे। देश में अमन, चैन रहना चाहिए। 

कोर्ट समझौता कराए हम तैयार: इकबाल 

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या मामले में राजनीति हो रही है। आपसी सुलह का प्रयास पहले भी कई बार हो चुका है। कोर्ट के सामने आपसी सुलह की बातचीत हो। सुप्रीम कोर्ट को पक्षकारों, अधिकारियों, वकीलों, साधु-संतों, बुद्धिजीवियों को बुलाकर बातचीत होनी चाहिए। विहिप व हिंदू महासभा पहले ही समझौता न करने की बात कह चुका है। कोर्ट समझौता कराए तो हम तैयार हैं।

मुस्लिम पक्ष बाबर के साथ है तो कोई बातचीत नहीं
रामलला के सखा पक्षकार त्रिलोकीनाथ पांडेय ने कहा है कि मामले के समाधान का प्रयास बहुत लोगों ने किया। हिंदु समाज को जब तक पूरा स्थान नहीं मिलेगा तब तक वह संघर्षरत रहेगा। हिंदू समाज बलिदान देने से पीछे नहीं हटेगा। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी समझौते की पहल की थी जिसका मुसलमानों ने बायकाट कर दिया था। उसी समय यह तय हो गया था कि मुस्लिम पक्ष समझौता नहीं चाहता है। मुस्लिम पक्ष पहले तय करें कि वह बाबर के साथ है कि इस देश के साथ। यदि वह देश की आस्था एवं संविधान के साथ है तो रामलला का आदर करे। अगर पंचायत ही करनी थी तो मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों गया। हाईकोर्ट पहले ही हमारे पक्ष में फैसला सुना चुका है। 

निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में: दिनेंद्र दास 

निर्मोही अखाड़ा ने मध्यस्थता की वकालत की है। निर्मोही अखाड़ा के महंत व पक्षकार महंत दिनेंद्र दास का कहना है कि यदि बातचीत से मामले का समाधान हो जाएगा तो दोनों पक्षों में आपसी सामंजस्य, प्रेम, सद्भाव बना रहेगा। कोर्ट का फैसला किसी एक के पक्ष में आएगा ऐसे में नफरत फैलेगी। मध्यस्थता के लिए जिम्मेदार लोग चुनें जानें चाहिए, हम बातचीत के लिए तैयार हैं। 

राममंदिर पर नहीं होगा समझौता: कमलनयन दास 
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि भगवान राम के मंदिर पर अब कोई समझौता नहीं होगा। भगवान राम हिंदुओं के आराध्य हैं, राममंदिर रामजन्मभूमि पर नहीं तो कहां बनेगी। सुप्रीम कोर्ट मामले में देरी कर बराबर हिंदुओं का अपमान कर रहा है। जिनका कुछ नहीं है वह मध्यस्थता की बात कर रहेे हैं। मुसलमानों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। 

मध्यस्थता धर्म व समय दोनों की बर्बादी: विहिप 

विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि मध्यस्थता की बात मामले को लटकाने के लिए हो रही है। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता धर्म व समय दोनों की बर्बादी है। रामलला कब तक न्याय की धुरी पर चक्कर काटते रहेंगे। अब समझौता नहीं न्याय की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट को जनभावनाओं की कद्र करते हुए शीघ्र निर्णय देना चाहिए। 

जनता की कोर्ट सबसे बड़ी: सुरेश दास 
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य सुरेश दास ने कहा है कि जनता की कोर्ट सबसे बड़ी होती है और जनता की कोर्ट राममंदिर के पक्ष मेें है। अब सुप्रीम कोर्ट को भी भावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र फैसला सुनाना चाहिए। यह मंदिर का नहीं बल्कि श्रीरामजन्मभूमि का सवाल हैै। इसलिए अयोध्या में सिर्फ और सिर्फ राममंदिर का ही निर्माण होगा। 
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पहले भी हो चुके हैं सुलह-समझौता के प्रयास: राजकुमार दास 

श्रीरामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि सुलह-समझौत का प्रयास हो चुके हैं कोई निष्कर्ष आज तक नहीं निकला। हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस भी सात साल तक समझौते का प्रयास कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ भी नहीं हुआ। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, उम्मीद है कि जल्द ही निर्णय आएगा।

सुप्रीम कोर्ट का सुझाव स्वागत योग्य: रामदास
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का सुझाव स्वागत योग्य है। सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता के लिए किसी अधिकृत व्यक्ति की नियुक्ति करे वह सुप्रीमकोर्ट का सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी हो सकता है। संवैधानिक रूप से दोनों पक्षों से बातचीत की जानी चाहिए। मुसलमान बड़ा दिल दिखाते हुए करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करें। 
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