श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास का कहना है कि पहले से ही भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर उस स्थान पर था। आक्रांताओं ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया।
समतलीकरण के दौरान मिल रहे पुरावशेषों से साबित हो रहा है कि वहां बहुत विशाल मंदिर था। अभी और भी तमाम अवशेष खुदाई में मिलेंगें इसमें कोई संशय नहीं है। राममंदिर की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए इन अवशेषों को संग्रहालय बनाकर संरक्षित किया जाना चाहिए।
श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि समतलीकरण में जो अवशेष मिल रहे हैं उससे साबित होता है कि वहां पहले ही दिव्य-भव्य रामलला का मंदिर था, मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गयी थी।
शंख, चक्र, त्रिशूल, आमलक की आकृतियां दर्शाती हैं कि जो लोग कह रहे थे कि वहां मंदिर नहीं है, उन्हें अब सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो अवशेष मिल रहे हैं कि वे करीब दो हजार वर्ष पुराने हो सकते हैं, यह अवशेष हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं इन्हें परिसर में ही संरक्षित किया जाना चाहिए।
संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर के हक में जो निर्णय दिया है खुदाई में मिल रहे अवशेषों से सुप्रीम फैसले को भी बल मिल रहा है।
राममंदिर के अस्तित्व को नकारने वालों के लिए ये अवशेष बड़े सबूत के रूप में सामने आए हैं। अभी तो और गहराई तक खुदाई होगी तब और अवशेष मिलेंगे। ये पुरावशेष सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं इसलिए इनका संरक्षण किया जाना चाहिए।
हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने कहा कि पिछले कई दिनों से राममंदिर निर्माण के लिए चल रहे समतलीकरण के कार्य में विभिन्न प्रकार के अवशेष मिले हैं, जिसमें कसौटी दार खंभे, चक्र, धनुष बने स्तंभ, देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमा यह सभी इस बात को स्पष्ट करते हैं कि यही स्थान भगवान श्रीराम का जन्म स्थान है।
यहां करीब दो हजार वर्ष पूर्व महाराज विक्रमादित्य ने मंदिर निर्माण कराया था जिसे कुछ विदेशी आक्रांताओं ने तोड़कर मस्जिद का आकार दिया था। अब खुदाई में मिल रहे अवशेष मंदिर की प्रमाणिकता सिद्ध कर रहे हैं।