लखनऊ। महानगर में गोल मार्केट स्थित डाकघर में तैनात ग्रामीण डाकसेवक (जीडीएस) अंकित (22) ने बुधवार रात डाकघर में ही बने सर्वेंट क्वार्टर में फंदा लगाकर जान दे दी। बृहस्पतिवार सुबह उनका शव कमरे में पंखे से लटका मिला। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के कारण का पता नहीं चल सका है। परिजनों को सूचना दी गई है।
इंस्पेक्टर महानगर अखिलेश कुमार मिश्र ने बताया कि अंकित मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रजावत पोस्ट के रहने वाले थे। वह जीडीएस होने के साथ रात को डाकघर में ही सिक्योरिटी गार्ड का काम भी करते थे। वह डाकघर में बन सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे।
अंकित दस दिनों की छुट्टी के बाद बुधवार शाम लौटे थे। देर रात परिजनों ने उन्हें कई बार फोन किया पर उनकी कॉल रिसीव नहीं हुई। बृहस्पतिवार सुबह परिजनों ने अंकित के सहयोगियों को इसकी जानकारी दी। इस पर कुछ सहयोगी अंकित के कमरे पहुंचे तो दरवाजा भिड़ा हुआ था और अंदर अंकित का शव पंखे से बिजली के तार के सहारे लटकता मिला।
मौके पर महानगर पुलिस भी पहुंच गई। छानबीन के लिए फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। इंस्पेक्टर महानगर ने बताया कि अंकित ने फंदा लगाकर आत्महत्या की है, पर कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। उनके परिजन हरियाणा से आ रहे हैं।
अफसरों पर डबल ड्यूटी करवाने का आरोप
लखनऊ। गोल मार्केट स्थित डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक अंकित की आत्महत्या से उनके साथियों में रोष है। साथी कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि अफसर उनसे डबल ड्यूटी ले रहे थे। दिन के साथ रात में भी ड्यूटी करवा रहे थे। साथ ही बेगारी भी करवाते थे। हालांकि, प्रवर डाक अधीक्षक ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।
डाक कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ग्रामीण डाक सेवक होने के कारण अफसर अंकित पर निजी कार्य करने का दबाव भी डालते थे। उनसे दिन में ग्रामीण डाक सेवक का काम लिया जाता था, वहीं रात में चौकीदारी करवाई जाती थी। इसके अलावा आला अफसर अपने निजी काम भी करवाते थे। आरोप है कि गैस सिलिंडर से लेकर बच्चों को स्कूल छोड़ने तक का काम लिया जाता था। कार भी धुलवाई जाती थी। इतना काम करने के बाद भी अफसर उसे डांटते, फटकारते थे। इस वजह से वह काफी समय से अवसाद में चल रहे थे।
नौकरी से निकालने की दी गई थी धमकी
साथी कर्मचारियों ने बताया कि अंकित काम के दबाव से परेशान होकर छुट्टी लेकर हरियाणा चले गए थे। बुधवार शाम वह ड्यूटी पर लौटे थे। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि निरीक्षण के दौरान शौचालय की सफाई के लिए भी उसे डांटा गया था। उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी गई थी।
ग्रामीण डाकसेवक अंकित की मौत को लेकर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे फर्जी व बेबुनियाद हैं। उससे ड्यूटी से अधिक कोई काम नहीं लिया जाता था। -सचिन कुमार चौबे, प्रवर अधीक्षक डाकघर, लखनऊ मंडल