अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले देश भर के 250 से ज्यादा किसान संगठनों ने 8 जनवरी को ग्रामीण भारत बंद का आह्वान किया है। संघर्ष समिति की ओर से गांवों में पर्चे बांटकर बंद की अपील की जा रही है। उस दिन दूध, सब्जी समेत कोई भी उत्पाद गांव से बाहर नहीं जाएगा और बाहर से कोई सामान गांव में नहीं आएगा।
किसान संघर्ष समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने बताया कि 8 जनवरी को ग्रामीण भारत बंद करके किसान नए साल में अपनी पीड़ा को दर्शाते हुए सरकार से उनसे निवारण की उम्मीद करेंगे। सरकार ने समस्याओं का समाधान नहीं किया तो जायज मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, हर किसान को तय करना है कि वह सरकार से खुश है या उसकी उम्मीदों पर पानी फिरा है ? भाजपा सरकार दावा कर रही है कि किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम दिया है। उन्होने किसानों से पूछा है कि क्या उन्हें धान व गेहूं का रेट लगभग 2500 रुपये क्विंटल और गन्ना मूल्य 435 रुपये क्विंटल मिला है ?
यदि नहीं तो 8 जनवरी को सरकार से बोलो कि लागत का डेढ़ गुना दाम नहीं मिला है। यदि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद विलंब से गन्ना मूल्य भुगतान पर ब्याज नहीं मिला है तो जमकर विरोध करो।
वीएम सिंह ने कहा है कि किसानों का कृषि व अन्य कर्ज माफ नहीं हुआ है, ओलावृष्टि से बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिला है, आवारा पशु फसलों का नुकसान कर रहे हैं, गांव की अधिगृहीत भूमि का मुआवजा 2013 के कानून के मुताबिक जमीन के रेट से चार गुना नहीं मिला है, 60 साल की उम्र के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है, पराली जलाने व गन्ने की पत्ती जलाने पर मुकदमे दर्ज किए गए है, दूध केरेट पर 5 रुपये सब्सिडी नहीं मिल रही है तो ग्रामीण भारत बंद करके इसका विरोध करो।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जिला स्तर पर बैठकें करके बंद की रणनीति तैयार की गई है। 29 दिसंबर को तहसील व ब्लाकवार संगठनों को बंद की जिम्मेदारी दी जाएगी। एक से 5 जनवरी तक जागरूकता कार्यक्रम चलेगा। इस दौरान एसडीएम व तहसीलदारों के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे जाएंगे। इसके बाद 8 जनवरी को ग्रामीण भारत बंद रहेगा।