लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल में रविवार को अमीनाबाद की मोहन मार्केट के संक्रमित व्यापारी की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़-फोड़ की। स्टाफ पर गुस्सा निकाला। करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा चलता रहा। पुलिस के समझाने के बाद परिजन शांत हुए।
लोकबंधु अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव व्यापारी पहले से भर्ती था। देररात उनकी हालत खराब हुई तो आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, मल्ट ऑर्गन फेल्योर के कारण मरीज को नहीं बचाया जा सका। इतना सुनते ही परिजन आक्रोशित हो गए। व्यापारी के बेटे का आरोप है कि आईसीयू में डॉक्टर व नर्स नदारद थे।
इससे उनके पिता को सही समय पर इलाज नहीं मिल सका। पापा के मरने के बाद भी डॉक्टर उन्हें ऑक्सीजन देते रहे। कुछ घंटों बाद जब एंबुलेंस आयी तो शिफ्ट करते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और मौके से भाग निकले। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत पहले से ही नाजुक थी। रात में ही रेफर को कहा था। दोपहर में शिफ्ट किया जा रहा था। एएलएस एंबुलेंस आ गई थी लेकिन शिफ्ट से पहले ही उसकी मौत हो गई।
डॉक्टर ने पैक की बॉडी
हालात सामान्य होने के बाद हेल्थ वर्कर लाश को बॉडी कवर में डालने से भी घबरा रहे थे। इसके बाद सीनियर डॉक्टर रूपेंद्र कुमार ने पीपीई किट पहनकर खुद बॉडी पैक की। इसके बाद एक कर्मी के सहयोग से इसे एंबुलेंस में रखा।