कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है। इसके अनुसार यदि एससी, एसटी और ओबीसी का अभ्यर्थी अधिक अंक लाकर मेरिट में ऊपर रहा तो भी उसे आरक्षित सीट पर ही चयनित किया जाएगा। मेरिट में ऊपर होने पर भी उसे सामान्य वर्ग में चयनित नहीं माना जाएगा।
आयोग का यह आदेश आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों पर अत्याचार कर रहा है। वैसे ही सरकार आउट सोर्सिंग के जरिए काम करा रही है जिसमें आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। उस पर अब सरकारी नौकरियों में भी आरक्षण खत्म कर सरकार एससी, एसटी और ओबीसी के बच्चों का गला दबा रही है, उन्हें नेस्तनाबूद कर रही है।
रामगोविंद ने कहा कि भाजपा को 312 सीटें दिलाने में ओबीसी वर्ग का सबसे बड़ा योगदान है। लेकिन इस मुद्दे पर भाजपा का एक भी विधायक सरकार के खिलाफ नहीं बोल रहा। ओबीसी के विधायकों को तो इस मुद्दे पर इस्तीफा देना चाहिए।
85 प्रतिशत आबादी के खिलाफ है निर्णय : लालजी वर्मा
विधानसभा में बसपा दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि लोक सेवा आयोग का यह आदेश प्रदेश की 85 प्रतिशत आबादी के खिलाफ है। इस आदेश से 85 प्रतिशत आबादी को केवल 49.5 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, वहीं 15 प्रतिशत आबादी को 50.5 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण न तो कोई खत्म कर सकता है न कम कर सकता है। सपा, बसपा सहित समूचा विपक्ष आए दिन सदन में आरक्षण के मुद्दे पर हंगामा करके सरकार को बदनाम करने का षड्यंत्र करते हैं। भाजपा एससी, एसटी और ओबीसी का पूरा सम्मान करती है।
लोक सेवा आयोग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसे सदन में रखा जाएगा। वहीं खन्ना की भाषा शैली और व्यवहार को लेकर विपक्ष ने नाराजगी जताई।
हुआ यूं कि लोक सेवा आयोग के आदेश का मुद्दा उठने पर खन्ना ने तेज आवाज में गुस्से भरे लहजे में कहा कि विपक्ष के लोग आए दिन यही रोना रोते हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए रामगोविंद ने कहा कि आप कोई दरोगा नहीं हैं, जनप्रतिनिधि हैं। विपक्षी सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते।