बसपा की मंडलीय समीक्षा बैठक में गुरुवार को बसपाइयों में जमकर लात-घूंसे चले। बमुश्किल पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को शांत कराया। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकसभा चुनाव में शहर प्रत्याशी रहे सलीम अहमद पर दलितों को गालियां बकने का आरोप लगाया जिससे हंगामा और मारपीट हुई।
बाद में मामला बसपा सुप्रीमो मायावती तक पहुंचा तो आनन-फानन जिलाध्यक्ष, जिला महासचिव और लोकसभा क्षेत्र प्रभारी को पार्टी से निकाल दिया गया। तीनों पदों पर नई नियुक्ति भी कर दी गई।
नवीन मार्केट स्थित पार्टी कार्यालय में गुरुवार दोपहर एक दिवसीय कैडर कैंप के तहत बैठक शुरू हुई। तभी लोकसभा क्षेत्र प्रभारी सुनील बाबू और जिलाध्यक्ष जेएन कुरील ने सलीम अहमद पर दलितों को गालियां देने का आरोप लगाया।
इनके आरोपों को जिला महासचिव अरविंद मठिया ने भी सही ठहराया। तभी कार्यकर्ता बबलू ने अरविंद मठिया से बैठने को कहा। इस पर दोनों में विवाद हो गया।
आरोप है कि अरविंद मठिया ने बबलू को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद बबलू के साथियों ने भी हमला बोल दिया। इसके बाद दोनों गुटों के लोगों में जमकर लात और घूंसे चलने लगे।
मायावती ने कहा, पार्टी से निकाल दो
बैठक में मौजूद जोन कोआर्डिनेटर इंद्रजीत सरोज, अशोक सिद्धार्थ, आसकरन संखवार, रामबाबू गौतम, अजय कुमार भारती और पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्र अंटू ने बमुश्किल कार्यकर्ताओं को शांत किया। बाद में बैठक स्थगित कर दी गई।
मामला पार्टी सुप्रीमो तक पहुंचा तो उन्होंने अनुशासनहीनता करने वाले पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित करने को कहा। इसके बाद जिलाध्यक्ष जेएन कुरील, महासचिव अरविंद मठिया और लोकसभा क्षेत्र प्रभारी सुनील बाबू कुरील को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
राम कृष्ण भास्कर को जिलाध्यक्ष, रवींद्र कठेरिया को लोकसभा क्षेत्र प्रभारी और राजेश भारती को जिला महासचिव बनाया गया है।
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सलीम अहमद ने कहा कि मैं इलाहाबाद में हूं। घटना के बारे में जानकारी मिली है। मैंने कभी भी किसी को गाली नहीं दी। न ही सुनील बाबू से मेरा कोई विवाद था। सभी आरोप झूठे हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष जेएन कुरील मुकेश ने कहा कि सुनील बाबू का सलीम से कुछ लेनदेन का विवाद है। इसी बात को लेकर हंगामा शुरू हुआ। मैं सभी को समझा रहा था। मैं बसपा का अनुशासित सिपाही रहा हूं। बहिन जी का हर फैसला मंजूर है।