धरती का भगवान बनने की कोशिश में जुटे मेडिकल स्टूडेंट्स ने पीजीएमईई की दोबारा हो रही काउंसलिंग रोकने के लिए मरीनों की जान तक की परवाह नहीं की। आक्रोशित मेडिकल छात्र-छात्राओं ने पहले तो केजीएमयू की ओपीडी ठप कर दी। जब इससे भी बात नहीं बनी तो ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित कर दी।
इसके चलते इलाज न मिलने से 6 मरीजों ने दम तोड़ दिया जबकि 100 से अधिक मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। डॉक्टरों का आक्रोश इतना अधिक था कि उन्होंने मरीजों को जांच रिपोर्ट भी नहीं लेने दी।
तीन दिन से केजीएमयू परिसर में काउंसलिंग करवाने में असफल रहने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सोमवार को नेशनल पीजी कॉलेज में काउंसलिंग शुरू करवाई। खबर मिलते ही मेडिकल स्टूडेंट्स वहां पहुंच गए और काउंसलिंग रोकने के लिए जमकर हंगामा किया।
पुलिस और प्रशासन के साथ उनकी कई बार भिड़ंत की नौबत आई। धक्का-मुक्की हुई लेकिन काउंसलिंग बदस्तूर जारी रही। अपने हाथ से भविष्य निकलाता देख कई छात्राएं तो फूट-फूट कर रो पड़ीं। तब आक्रोशित मेडिकोज ने केजीएमयू की ओपीडी में जाकर डॉक्टरों से मरीज न देखने की अपील की। न मानने पर मरीजों का पर्चा बनाने से रोक दिया और न्यू ओपीडी के गेट पर ताला जड़ दिया।
क्यों भड़के हैं मेडिकोज
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपीपीजीएमईई-2016 की दोबारा काउंसलिंग की जा रही है। इसमें प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों को कुल प्राप्तांक में 30 फीसदी का वेटेज दिया जा रहा है। इसे लेकर एमबीबीएस कर चुके स्टूडेंट्स नाराज हैं। उन्हें आशंका है कि इस फैसले से उनकी सीट छिन जाएगी।
इन मरीजों की मौत
1. अहिल्या देवी (60) बिठौली, 2. मुश्ताक (40) सीतापुर, मेडिसिन वार्ड में भर्ती था। 3. उमरदीन (35) हरदोई, मेडिसिन वार्ड में भर्ती था। 4. विनोद (40), लखनऊ ट्रामा में। 5. राजेश (29), लखनऊ, ट्रॉमा में। 6. आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेंटव वार्ड में भर्ती एक बुजुर्ग की भी मौत।
सीनियर डॉक्टरों की छुट्टियां कैंसिल
केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत ने कहा कि किसी ने भी हड़ताल का नोटिस नहीं दिया है। सभी सेवाएं पहले की तरह चल रही हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सीनियर डॉक्टरों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई हैं, ताकि इमरजेंसी सेवाएं बाधित न होने पाएं।