लखनऊ। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश देने में निजी विद्यालयों की लापरवाही सामने आई है। दाखिले के लिए अभिभावकों को जिलाधिकारी कार्यालय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय और निजी स्कूलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अभिभावकों की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने राजधानी के 35 से अधिक नामी निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया है। आरटीई के नियमों का पालन न करने पर इन स्कूलों की मान्यता रद्द करने की चेतावनी भी दी गई है। बीएसए के अनुसार, जयपुरिया, सीएमएस, टीपीएस, एलपीएस, स्टडी हॉल समेत 35 से अधिक नामी स्कूलों ने अभी तक आरटीई के तहत बच्चों के प्रवेश के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर इन विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। तय समयसीमा में प्रवेश प्रक्रिया पूरी न करने वाले स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
1600 स्कूलों में होने हैं प्रवेश
राजधानी में 1600 से अधिक निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत करीब 15 हजार सीटों पर गरीब बच्चों के प्रवेश का प्रावधान है। इनमें से अब तक लगभग 12 हजार बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है।
अभिभावकों ने बीएसए से की शिकायत
मधुबन विहार कॉलोनी निवासी अजय कुमार सिंह ने बीएसए को पत्र लिखकर शिकायत की है कि उनके पुत्र श्रेयस प्रताप सिंह का आरटीई के तहत चयन हुआ है और डीपीएस गोमतीनगर स्कूल आवंटित किया गया है। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने जूनियर सेक्शन (नर्सरी से कक्षा 5 तक) दो वर्ष पहले बंद होने की बात कहकर प्रवेश देने से इन्कार कर दिया।