लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत सत्र 2025-26 में राजधानी के निजी स्कूलों में दाखिला पाए 12,600 बच्चों की पढ़ाई पर अब शिक्षा विभाग आठवीं कक्षा तक नजर रखेगा। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने यह निर्णय लिया है कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा या भेदभाव झेलना न पड़े।
अधिकांश बच्चों को प्री-नर्सरी और कक्षा एक में दाखिला मिला है। इन सभी छात्रों की पढ़ाई अब उसी स्कूल से पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी। यदि किसी भी छात्र या अभिभावक को शुल्क वसूली, अलग बैठाने या किसी प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो वे बीएसए कार्यालय में आरटीई समन्वयक से शिकायत कर सकते हैं।
नहीं ले सकते कोई अतिरिक्त शुल्क
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों से किसी भी प्रकार की फीस या चार्ज वसूलना कानून का उल्लंघन होगा। इसके बावजूद कुछ स्कूलों की ओर से खेलकूद, वार्षिक उत्सव, परीक्षा शुल्क आदि के नाम पर अभिभावकों से पैसे मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
अलग कक्षा में बैठाने पर भी होगी कार्रवाई
आरटीई के बच्चों को अन्य छात्रों से अलग बैठाकर पढ़ाने की अनुमति नहीं है। विभाग ने इस तरह के भेदभाव को गंभीर माना है और कार्रवाई की चेतावनी दी है। समय-समय पर स्कूलों की जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पास आरटीई छात्रों की अद्यतन सूची मौजूद रहेगी, जिससे निगरानी को प्रभावी बनाया जा सकेगा।
बीएसए राम प्रवेश के अनुसार, आरटीई के तहत इस बार हर साल की अपेक्षा सबसे अधिक बच्चों को प्रवेश मिला है। अब इन बच्चों की निशुल्क पढ़ाई आठवीं तक सुनिश्चित हो सके इसके लिए मॉनिटरिंग की योजना बनाई गई है। कोई बच्चा यदि परेशान किया जाता है तो अभिभावक उसकी शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं।