राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत-नेपाल सीमा पर तेजी से बन रहे मदरसों, मस्जिदों और एक विशेष वर्ग की आबादी में बढ़ोतरी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।
साथ ही संघ के स्वयंसेवक से लोगों को सच्चाई बताने का आह्वान किया है। जनता से भी इस खतरे को लेकर सावधान रहने को कहा है।
इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की गुलामों वाली मानसिकता देश के लिए चुनौती बन गई है। इसके लिए जनता को भी जगना होगा।
चार दिन पहले कोच्चि (केरल) में संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार पर हमला बोला। कहा कि सीमाओं की सुरक्षा करने में केंद्र सरकार पूरी तरह असफल है। यह स्थिति देश के लिए खेदजनक और घातक है। लगभग 4057 किलोमीटर लंबी भारत-तिब्बत सीमा सबसे ज्यादा उपेक्षित है।
अनेक क्षेत्र ऐसे हैं, जहां हमारे देश की पक्की सड़कें सीमाओं से 50-60 किमी. पहले ही समाप्त हो जाती हैं। जहां तक पक्की सड़के हैं भी, उनमें भी कई गांवों में सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही बस जाती है।
बिजली, अस्पताल, स्कूल तक नहीं है। सीमाओं पर संचार सुविधाओं का भी अभाव है। नतीजतन चीन को मनमानी करने की पूरी छूट मिली हुई है।
एक तरफ से बांग्लादेश और दूसरी तरफ से पाकिस्तान भी इस स्थिति का फायदा उठा रहा है। चीन द्वारा पशुओं के चरागाहों पर कब्जा कर लिया गया है। यही स्थिति पाकिस्तान सीमा पर भी है।
सरकार सीमा पर स्थित गांवों के लोगों की सुरक्षा व सुविधाओं को लेकर चिंतित नहीं दिखाई देती। नतीजतन गांव खाली होते जा रहे हैं। पाकिस्तान को अपने पैर पसारने का मौका मिलता जा रहा है।
इन सीमाओं पर अंधाधुंध तस्करी
प्रस्ताव में नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं को अवैध व्यापार, मानव तथा मादक पदार्थों व अवैध हथियारों की तस्करी के लिए सबसे अधिक असुरक्षित क्षेत्र बताया गया है। आरोप लगाया गया कि इन अवैध गतिविधियों को कोई रोकने या टोकने वाला नहीं।
नेपाल की सीमा पर तेजी से और अवैध तरीके से मदरसे, मस्जिदें बनती जा रही हैं। इनके सहारे एक वर्ग विशेष की आबादी भी इस क्षेत्र में अपने पैर पसार रही है। पर, केंद्र सरकार निश्चिंतता से बैठी है।
केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों का यह तर्क पूरी तरह गलत है कि अपने देश की सीमाएं पूरी तरह निर्धारित नहीं हैं। संघ ने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र्र सरकार के सामने कुछ मांगें रखी हैं। साथ ही जनता से सीमाओं की सुरक्षा के लिए खुद आगे आने का आह्वान किया है।