टिकट बंटवारे को लेकर खफा हुए नेताओं को मनाने की जगह भाजपा को एक विकल्प मिल गया है, जिसकी सहायता से वह 'डैमेज कंट्रोल' करना चाहती है।
नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के लिए संघ परिवार और सक्रिय हो गया है। इसके लिए आगे के तीन चरणों में पांच से छह मतदान केंद्रों को फोकस करते हुए संघ परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया है।
लोकसभा स्तर पर संघ के वरिष्ठ प्रचारकों को समन्वयक के रूप में लगाया गया है। साथ ही विधानसभा क्षेत्रवार भी समन्वयक समूह बनाए गए हैं।
भाजपा का पूरा चुनाव इन समूहों और संघ की तरफ से बतौर समन्वयक लगाए गए वरिष्ठ प्रचारकों की देखरेख में लड़ा जाएगा।
समर्थन जुटाना है उद्देश्य
लोकसभा समन्वयक से लेकर स्थानीय स्तर तक के कार्यकर्ता समूहों को संबंधित क्षेत्र में संघ परिवार से जुड़े सभी संगठनों से समन्वय बनाने और उन्हें भाजपा उम्मीदवारों के लिए समर्थन में जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नाराज लोगों को मनाने और उन्हें भाजपा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उम्मीदवार का स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद व समन्वय बनाने, मतदान के लिए चल रही तैयारियों की समीक्षा करने और खामियों को सुधारने तथा वोट बढ़ाने की कार्ययोजना बनाकर उसे अमली जामा पहनाने का काम भी संघ ने इन लोगों को सौंपा है।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर एक संघ कार्यकर्ता के रूप में ही शुरू हुआ था। अतः मोदी को पीएम बनाकर संघ खुद के विस्तार के बारे में भी सोच रहा है।
विद्रोह के कारण संघ सक्रिय
दरअसल टिकट वितरण के बाद जिस तरह जगह-जगह विरोध व विद्रोह सामने आया, कई कार्यकर्ता व नेता घर बैठ गए।
साथ ही कई जगह से यह शिकायतें सार्वजनिक हुई कि पार्टी उम्मीदवार भी स्थानीय कार्यकर्ताओं से तालमेल नहीं बनाकर चल रहे हैं।
पार्टी के निष्ठावान व अनुभवी लोगों को दरकिनार करके काम कर रहे हैं। इन सूचनाओं ने संघ के कान खड़े कर दिए।
उसे लगा कि संघ के पुराने और विश्वसनीय लोगों को न जुटाया गया तो यह स्थितियां बना-बनाया माहौल बिगाड़ देंगी। साथ ही ‘मिशन मोदी’ की राह में मुश्किलें खड़ी हो सकती है।
प्रबंधन पर है पैनी नजर
पूरे अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ प्रचारक ने बताया कि पांच-छह मतदान केंद्रों को फोकस करते हुए लगाए गए विभिन्न संगठनों के लोगों को न सिर्फ चुनावी अभियान बल्कि मतदान के लिए चल रहे प्रबंधों पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके लिए यह न सिर्फ बूथ कमेटियों की समीक्षा कर रहे हैं बल्कि जहां कहीं ये सब सिर्फ कागजों तक ही सीमित है, वहां अन्य लोगों को जोड़कर मतदान के दिन की जरूरी तैयारियों के लिए वैकल्पिक प्रबंध किए जा रहे हैं।
साथ ही कहां पर किन-किन लोगों से मिलकर वोटों बढ़ाने का प्रबंध किया जा सकता है। इस काम में कौन व्यक्ति उपयोगी हो सकता है। कहां पर क्या खामियां हैं और उन्हें कैसे ठीक किया जा सकता है।
यह सारी रणनीति भी इन समूहों को तय करने की जिम्मेदारी दी गई है। समूहों को रोजाना जिला समन्वयक को पूरी जानकारी देनी है। अगर कहीं स्थानीय समूहों से बात नहीं बन रही है तो जिला या प्रदेश से लोग भेजे जा रहे हैं।