दिल्ली में पराजय पर मनन-मंथन के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भविष्य के एजेंडे पर फोकस शुरू कर दिया है। इसकी वजह भविष्य में होने वाले चुनाव ही हैं। इसके लिए संघ ने लुक ईस्ट नीति पर काम करने का मन बनाया है, यहां लुक ईस्ट से मतलब देश के पूर्वी राज्यों में संघ की जमीन मजबूत करने से है।
खास बात यह कि इसमें शाखाओं के बजाय संस्कृति, शिक्षा व संस्कारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके तहत लोगों को पहले कथाओं से जोड़कर फिर शाखाओं से जोड़ने की कोशिश होगी। पूरी कार्ययोजना बनाने के लिए एक से तीन मार्च तक धनबाद (झारखंड) में बैठक बुलाई गई है।
इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और विहिप के संरक्षक अशोक सिंहल सहित अन्य कई वरिष्ठ लोग मौजूद रहेंगे।
‘परिणाम कुंभ’ नाम से आयोजित इस बैठक में उत्तर प्रदेश सहित बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिसा सहित कुछ अन्य पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है।
भाजपा की सफलता का प्लान होगा तैयार
तीन दिन की बैठक में जहां इन राज्यों में संघ परिवार के अब तक के कामकाज की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा वहीं, आगे आने वाली चुनौतियों में भगवा टोली की सफलता का तानाबाना भी बुना जाएगा। इसके लिए पूरी कार्ययोजना तय करके उसी के अनुसार कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण का खाका तैयार किया जाएगा।
चुनौतियों से निपटने को बदली रणनीति
संघ ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बदली है। तय किया गया है कि शाखाओं का काम अपनी जगह चलता रहे लेकिन लोगों को जोड़ने के लिए धर्म, संस्कृति व शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
इसके लिए संघ व विहिप ने इन राज्यों में बड़े पैमाने पर रामकथा और कृष्णकथा कहने वालों की टोलियां तैयार करने की योजना बनाई है। इन राज्यों के पिछड़े हिस्सों में चल रहे एकल विद्यालयों की संख्या को अगले एक वर्ष में दोगुना करने की रणनीति भी एजेंडे में रखी गई है।
दिया जाएगा 'रामकथा' व 'कृष्णकथा' का प्रशिक्षण
योजना के तहत संघ और विहिप इन राज्यों से लोगों को चयन करके उन्हें रामकथा और कृष्णकथा का प्रशिक्षण देंगे। फिर उन्हें इन राज्यों में काम सौंपा जाएगा। संघ के रणनीतिकारों का मानना है कि इसका लाभ यह होगा कि जो लोग सीधे संघ से जुड़ने से हिचकते हैं, वे भी किसी न किसी रूप में नजदीक आएंगे।
खासतौर से वे लोग जो स्थानीय राजनीतिक वजहों से कई बार संघ के सामाजिक कामों में हिस्सा लेने से बचते हैं। इसी तरह पिछड़े इलाकों में एकल विद्यालयों की संख्या बढ़ाकर भी लोगों को नजदीक लाया जा सकेगा।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार, हमारा काम संगठन के विस्तार के साथ-साथ सांस्कृतिक धर्मचेतना का विस्तार करना भी है। देश के सामने जिस तरह की चुनौतियां खड़ी हैं उसके चलते यह काम काफी अहम हो गया है। धनबाद की बैठक इस दिशा में महत्वपूर्ण फैसले करेगी।