बैठक में तय किया गया कि धर्मसभा के लिए लोगों को 24 नवंबर की रात से ही अयोध्या पहुंचने को कहा जाए। संघ के लोग वहां इन सबके भोजन और ठहरने की जिम्मेदारी उठाएं। बैठक में जिला प्रचारकों को 24 की दोपहर से 25 की सुबह तक सभी जगह से लोगों को अयोध्या भेज देने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह भी कहा गया कि लोगों को एसएमएस भेजकर भी अयोध्या पहुंचने का आग्रह किया जाए।
पता चला कि संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैया ने अयोध्या से वापस आने के बाद मंगलवार देर रात अपने सहयोगियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी विचार-विमर्श किया।
माना जाता है कि दोनों लोगों की बातचीत अयोध्या की स्थिति और धर्मसभा को लेकर केंद्रित रही। हालांकि अटकलें यह भी हैं कि इस बैठक में कोई न कोई महत्वपूर्ण रणनीति भी बनी है। पर, इसका खुलासा नहीं हुआ।
ध्यान रहे कि भैया जी जोशी ने सोमवार को अयोध्या में यह कहकर हलचल मचा दी थी कि रामलला का तिरपाल में यह अंतिम दर्शन है। भैया जी के इस बयान के गहरे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अयोध्या मुद्दे पर कुछ न कुछ ऐसा जरूर पक रहा है जिससे मंदिर निर्माण की राह आसान हो सके। बैठक में संघ का जोर अयोध्या धर्मसभा की सफलता और संघ की जमीन मजबूत बनाने के काम पर ही केंद्रित रहा।
बैठक में शामिल लोगों को जनता के बीच जाकर मंदिर पर संघ परिवार के संकल्प को बताने और उन्हें मंदिर निर्माण का भरोसा देने का काम भी सौंपा गया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि हिंदू समाज का जो भरोसा कायम है वह टूटने न दिया जाए।
स्वयंसेवक लोगों को यह विश्वास दिलाएं कि संघ का हिंदू समाज के सरोकारों से इधर-उधर जाने का कोई सवाल ही नहीं है। संघ हिंदू समाज की सेवा के लिए संकल्पबद्ध है। लोगों को यह भी बताएं कि कुछ शक्तियां षड्यंत्र पूर्वक हिंदू समाज को कमजोर करना चाहती हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
जानकारी के मुताबिक, संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी और सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने पदाधिकारियों से शाखाओं के साथ उनमें आने वालों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। भैया जी ने शाखा प्रमुखों, शाखा कार्यवाह, मुख्य शिक्षकों, नगर कार्यवाह, विभाग कार्यवाह को शाखाओं पर आने वाले स्वयंसेवकों का ख्याल रखने का सुझाव दिया।
कहा कि कोई स्वयंसेवक यदि तीन-चार दिन शाखा पर न आए तो उससे संपर्क करें। यदि उसे कहीं कोई समस्या है तो उसके समाधान में सहयोग करें। जो लोग शाखाओं से दूर हैं लेकिन वैचारिक रूप से समर्थक हैं उन्हें भी शाखाओं पर लाने पर ध्यान दिया जाए। बैठक में क्षेत्र प्रचारक और प्रांत प्रचारक भी मौजूद थे।