नगर विकास मंत्री और सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां ने रविवार को फिर भाजपा और संघ पर हमला बोला। कहा कि आरएसएस के मुखपत्र से उसकी नीति साफ हो गई है। संघ की नजर में भारत एक अघोषित हिंदू राष्ट्र है।
आजम ने चेताया है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी वैचारिक धारणा को अमली जामा पहनाने वाले कार्यकर्ताओं को नहीं रोका तो हम दुनिया को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे।
आजम ने दादरी के बाद हिमाचल के नाहन में गाय लेकर जा रहे एक व्यक्ति की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने हरियाणा व पंजाब सरकार से अपील की है कि वे अपने यहां पशु बाजारों में प्रतिबंधित पशुओं का मेला लगाने और उन्हें बेचने पर भी पाबंदी लगाएं।
उन्होंने सवाल किया कि प्रतिबंधित पशुओं को बेचने वालों पर भी फासिस्टों का ऐसा कहर क्यों नहीं टूट रहा जैसा प्रतिबंधित, गैरप्रतिबंधित पशुओं को ले जाने वालों की ढूंढ-ढूंढकर हत्या करने का जघन्य अपराध किया जा रहा है। काश, इन पशुओं को बेचने वालों और सरकारों को भी अपने कुकर्म पर शर्म आती।
सपा महासचिव ने राष्ट्रपति से अपील की है कि देश बड़ी तेजी से अराजकता की तरफ बढ़ रहा है। गाय के नाम पर आरएसएस के मुखपत्र में जो लेख लिखा गया है, उससे संघ की नीति बिल्कुल साफ हो गई है। उनके शब्दों में भारत एक अघोषित हिंदू राष्ट्र है।
जिनके हाथ में लाठी, डंडा तलवारें, कानून उन्हीं का
आजम बोले कि हिंदुओं की आस्था को किसी भी प्रकार से ठेस पहुंचाने वालों का अंजाम यही होगा कि उन्हें अपनी जान गंवानी होगी। इस विभाजनकारी मानसिकता से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि आज के हालात में देश की कानून-व्यवस्था उन्हीं लोगों के हाथ में है जिनके हाथों में लाठी, डंडा और तलवारें हैं।
हमारी जवाबदेही पूरे विश्व के प्रति
आजम ने कहा कि यदि इन घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा और और देश के प्रधानमंत्री ने अपनी वैचारिक धारणा को अमली जामा पहनाने वाले कार्यकर्ताओं को नहीं रोका तो हम दुनिया को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे। जो लोग यह समझते हैं कि भारत को छोड़कर शेष विश्व के प्रति हमारी कोई जवाबदेही नहीं है, वे आदिकाल के लोग हैं। उनका सभ्य समाज से कोई रिश्ता नहीं हो सकता।
हार्दिक पटेल के मानवाधिकारों का हनन
आजम ने देश के बुद्धिजीवियों, खास तौर से मानवाधिकारों के लिए लड़ने वालों से कहा है कि तथाकथित फासिस्ट ताकतों ने गुजरात में मानवाधिकारों का हनन किए जाने की ठेकेदारी ले रखी है।
गुजरात के एक वंचित समाज के नायक हार्दिक पटेल से वार्ता करने के बजाय जिस तरह वहां के आम आदमी को दबाया जा रहा है और खेलों तक में उन्हें टिकट देने पर पाबंदी है, यह मानवाधिकारों के हनन के साथ ही फासिस्ट ताकतों द्वारा किसी को भी सत्य कहने से रोकने का हिटलरशाही तरीका भी है। उन्होंने इसकी कड़ी निंदा की है।