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दलितों के आंदोलन से चिंता में संघ, डैमेज कंट्रोल के लिए लेगा मायावती के शासनादेश का सहारा

Wed, 04 Apr 2018 01:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत।
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दलितों के मुद्दे पर ताजा घटनाक्रम और बड़े पैमाने पर हुई हिंसक घटनाओं ने भाजपा की तो मुश्किलें बढ़ाई ही हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पेशानी पर भी पसीना ला दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी की प्रतिक्रिया इसका प्रमाण है। संघ की तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू की गई है।

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डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम तो पहले से ही तय थे। पर, अब इन्हें ताजा घटनाओं को समेटते हुए दलितों को समझाने और हकीकत बताकर मनाने पर भी फोकस करने का फैसला किया गया है। 13 अप्रैल को सीतापुर के नैमिषारण्य में होने वाले पहले कार्यक्रम को वरिष्ठ प्रचारक और संघ के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य इंद्रेश कुमार संबोधित करेंगे।

उधर, भाजपा ने भी नए हालात से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। उसने 14 अप्रैल से शुरू होने वाले सामाजिक समरसता अभियानों में बसपा सुप्रीमो मायावती की सरकार के एक शासनादेश का सहारा लेकर भी लोगों को समझाने की तैयारी की है। इसमें एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम में पूरी जांच-पड़ताल के बाद कार्रवाई की बात कही गई थी।
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दरअसल, संघ ने दलित बस्तियों में मिशनरियों की पैठ और बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण की घटनाओं को देखते हुए 80 के दशक में दलितों के बीच संघ की पकड़ व पैठ बढ़ाने का अभियान शुरू किया था। हिंदू समाज की बृहद एकता के नाम पर संघ के लोगों ने दलितों की बस्तियों में सहभोज और छुआछूत विरोधी अभियान जैसे कार्यक्रमों से इस काम का प्रारंभ किया था।

इसी सिलसिले में 1983 में संघ ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) पर सामाजिक समरसता मंच की स्थापना भी की थी। इस मंच का मुख्य काम दलितों की बस्तियों में सेवा कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और इनमें रहने वाले गरीबों को रोजगार मुहैया कराने में मदद के साथ महिलाओं और बालिकाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद कराना है।

पिछले दिनों मेरठ में भी हुआ आह्वान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - फोटो : amar ujala
राम जन्मभूमि आंदोलन से पहले संघ की तरफ से यह अभियान काफी व्यापक स्तर पर चलाया गया। इसमें विश्व हिंदू परिषद ने भी सक्रिय भागीदारी की थी। फरवरी में मेरठ में संघ के कार्यक्रम ‘राष्ट्रोदय’ में भी सर संघचालक मोहन भागवत ने भी हिंदू समाज से भेदभाव को त्यागने की अपील कर दलितों को हर हाल में साथ जोड़े रखने पर जोर दिया था। 2011 से संघ ने दलित वर्ग के युवाओं को शाखाओं में लाने और उनके जरिये उनके समाज और परिवार से संपर्क का अभियान चलाया था।

इसके लिए ‘संघ को समझें’ नाम से एक पुस्तिका भी छपवाई गई थी। इसका उद्देश्य था कि हिंदुत्व के एजेंडे पर फोकस करने वाले संघ को पता है कि उसके एजेंडे की सफलता के लिए अगड़े, पिछड़े और दलितों की एकजुटता पहली शर्त है। पर, एससी-एसटी एक्ट के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम जमानत के प्रावधान करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सोमवार को भारत बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं ने संघ को परेशान कर दिया है।

यह है वजह
सभी को पता है कि वर्ष 2014 के लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भाजपा की सफलता में हिंदुत्व के एजेंडे पर फोकस और हिंदुओं के सभी वर्गों का मिला समर्थन था। इन्हीं सामाजिक समीकरणों पर भाजपा ने देश के कई राज्यों में सफलता पाई। साथ ही भगवा टोली के रणनीतिकार इसी फार्मूले पर 2019 की तैयारी कर रहे थे। इनकी कोशिश चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने की है। खासतौर से गठबंधन की संभावना को देखते हुए रणनीतिकारों को इस तरह के फार्मूले से ही जीत का रास्ता दिख रहा था।

पिछले वर्ष लखनऊ आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के लोगों को सपा, बसपा और कांग्रेस से निपटने के लिए भाजपा के मतों का प्रतिशत 42 से बढ़ाकर 52 से 55 प्रतिशत करने के लिए जुटने का आह्वान किया था। उन्होंने यह संकेत भी दिया था कि 2019 में पूरा विपक्ष मिलकर भाजपा से मुकाबला करने उतरेगा। पर, ताजा घटनाक्रम ने भगवा टोली के रणनीतिकारों के लिए चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने की राह में मुश्किल खड़ी कर दी।
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20 मई 2007 को मायावती की सरकार में जारी दूसरे शासनादेश का अंश

बसपा सुप्रीमो मायावती
अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के क्रियान्वयन में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। इस अधिनियम का सहारा लेकर कतिपय लोग सरकार को बदनाम करने का प्रयास करेंगे। यह भी देखा गया है कि कभी-कभी दबंग व्यक्ति आपसी वैमनस्य के कारण प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मोहरा बनाकर झूठा मुकदमा दर्ज करा देते हैं अत: ऐसे मामलों में अविलंब सत्यता की पुष्टि करने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाए।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का दुरुपयोग किसी भी दशा में न हो। छोटे-छोटे मामलों का निस्तारण सामान्य अधिनियमों के अंतर्गत किया जाए तथा गंभीर मामलों जैसे हत्या, बलात्कार आदि के मामलों में ही अनूसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाए। पुलिस महानिदेशक प्रत्येक माह विभिन्न जनपदों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अधीन दर्ज अभियोगों की सूची मंगवा कर उसकी जानकारी अपने स्तर पर एकत्र कर प्रमुख सचिव गृह को अवगत कराएंगे।

29 अक्टूबर 2007 को जारी शासनादेश का अंश
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के उत्पीड़न के मामले में यह ध्यान रखा जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति का अनावश्यक उत्पीड़न न किया जाए। यदि विवेचना में यह पाया जाए कि झूठा मामला बनाया गया है तो भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 182 के तहत कार्रवाई की जाए। पुलिस महानिदेशक प्रत्येक माह विभिन्न जनपदों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अधीन दर्ज अभियोगों की सूची मंगाकर उसकी जानकारी अपने स्तर से कर शासन को समय-समय पर अवगत कराएं।
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