राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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राम जन्मभूमि आंदोलन से पहले संघ की तरफ से यह अभियान काफी व्यापक स्तर पर चलाया गया। इसमें विश्व हिंदू परिषद ने भी सक्रिय भागीदारी की थी। फरवरी में मेरठ में संघ के कार्यक्रम ‘राष्ट्रोदय’ में भी सर संघचालक मोहन भागवत ने भी हिंदू समाज से भेदभाव को त्यागने की अपील कर दलितों को हर हाल में साथ जोड़े रखने पर जोर दिया था। 2011 से संघ ने दलित वर्ग के युवाओं को शाखाओं में लाने और उनके जरिये उनके समाज और परिवार से संपर्क का अभियान चलाया था।
इसके लिए ‘संघ को समझें’ नाम से एक पुस्तिका भी छपवाई गई थी। इसका उद्देश्य था कि हिंदुत्व के एजेंडे पर फोकस करने वाले संघ को पता है कि उसके एजेंडे की सफलता के लिए अगड़े, पिछड़े और दलितों की एकजुटता पहली शर्त है। पर, एससी-एसटी एक्ट के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम जमानत के प्रावधान करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सोमवार को भारत बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं ने संघ को परेशान कर दिया है।
यह है वजह
सभी को पता है कि वर्ष 2014 के लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भाजपा की सफलता में हिंदुत्व के एजेंडे पर फोकस और हिंदुओं के सभी वर्गों का मिला समर्थन था। इन्हीं सामाजिक समीकरणों पर भाजपा ने देश के कई राज्यों में सफलता पाई। साथ ही भगवा टोली के रणनीतिकार इसी फार्मूले पर 2019 की तैयारी कर रहे थे। इनकी कोशिश चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने की है। खासतौर से गठबंधन की संभावना को देखते हुए रणनीतिकारों को इस तरह के फार्मूले से ही जीत का रास्ता दिख रहा था।
पिछले वर्ष लखनऊ आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के लोगों को सपा, बसपा और कांग्रेस से निपटने के लिए भाजपा के मतों का प्रतिशत 42 से बढ़ाकर 52 से 55 प्रतिशत करने के लिए जुटने का आह्वान किया था। उन्होंने यह संकेत भी दिया था कि 2019 में पूरा विपक्ष मिलकर भाजपा से मुकाबला करने उतरेगा। पर, ताजा घटनाक्रम ने भगवा टोली के रणनीतिकारों के लिए चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने की राह में मुश्किल खड़ी कर दी।
अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के क्रियान्वयन में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। इस अधिनियम का सहारा लेकर कतिपय लोग सरकार को बदनाम करने का प्रयास करेंगे। यह भी देखा गया है कि कभी-कभी दबंग व्यक्ति आपसी वैमनस्य के कारण प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मोहरा बनाकर झूठा मुकदमा दर्ज करा देते हैं अत: ऐसे मामलों में अविलंब सत्यता की पुष्टि करने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाए।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का दुरुपयोग किसी भी दशा में न हो। छोटे-छोटे मामलों का निस्तारण सामान्य अधिनियमों के अंतर्गत किया जाए तथा गंभीर मामलों जैसे हत्या, बलात्कार आदि के मामलों में ही अनूसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाए। पुलिस महानिदेशक प्रत्येक माह विभिन्न जनपदों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अधीन दर्ज अभियोगों की सूची मंगवा कर उसकी जानकारी अपने स्तर पर एकत्र कर प्रमुख सचिव गृह को अवगत कराएंगे।
29 अक्टूबर 2007 को जारी शासनादेश का अंश
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के उत्पीड़न के मामले में यह ध्यान रखा जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति का अनावश्यक उत्पीड़न न किया जाए। यदि विवेचना में यह पाया जाए कि झूठा मामला बनाया गया है तो भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 182 के तहत कार्रवाई की जाए। पुलिस महानिदेशक प्रत्येक माह विभिन्न जनपदों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अधीन दर्ज अभियोगों की सूची मंगाकर उसकी जानकारी अपने स्तर से कर शासन को समय-समय पर अवगत कराएं।