सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व की तैयारी जिलों तक संगठन के पुनर्गठन की है। इसकी एक वजह पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट में कई जिलाध्यक्षों को लेकर नेतृत्व के पास पहुंची शिकायतें हैं। इन पर कुछ विशेष जनप्रतिनिधियों के प्रवक्ता व पैरोकार की तरह व्यवहार करने के आरोप हैं।
कुछ पर निकाय चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार के बजाय अपनी पसंद के प्रत्याशी के पक्ष में काम करने की शिकायते हैं। कई जिलाध्यक्षों के निष्क्रिय रहने की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को मिली हैं।
कई मंडलों के पार्टी अध्यक्षों की निष्क्रियता और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं से तालमेल न रखने की सूचनाएं हैं। पिछले दिनों पार्टी ने बूथ स्तर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मनाने का फैसला किया था। इसका मकसद जिलों की सक्रियता जांचना था लेकिन कुछ जगह से रिपोर्ट ठीक नहीं रही।
क्षेत्रीय संगठनों में भी बदलाव होना है। इसकी वजह कुछ लोगों का सरकार में शामिल होना तो कुछ का विधायक बन जाना है। जिला और क्षेत्र संगठनों में काम करने वाले कुछ लोगों को पार्टी नेतृत्व तरक्की देकर क्रमश: क्षेत्र या प्रदेश स्तर पर लाना चाहता है।
जिलों और क्षेत्रों के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को अब तक के काम का पुरस्कार देने की भी योजना है। इसके तहत नेतृत्व ने उन्हें सरकारी संस्थाओं में समायोजित करने का निश्चय किया है। कुछ का समायोजन जिलों और मंडलों पर होगा लेकिन कुछ का समायोजन प्रदेश स्तर की संस्थाओं में करने की तैयारी है। इस नाते भी फेरबदल होना तय है।