संघ परिवार के संगठनों में मोदी सरकार के कामकाज को लेकर पनप रही नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खुद संभाल ली है।
माना जा रहा है कि इसके पीछे मकसद यूपी के 2017 के चुनावी समर में भाजपा के रास्ते को निरापद बनाना है, जिससे चुनाव के समय संघ का पूरा कुनबा भाजपा के साथ रहे। इन सबकी साझी मेहनत से भाजपा के लिए वोटों का इंतजाम किया जा सके।
इस सिलसिले में भागवत ने विश्व हिंदू परिषद के साथ बैठक करके संघ से जुड़े सभी संगठनों की सुनने और उन्हें समझाने का सिलसिला शुरू भी कर दिया है। विहिप के बाद भारतीय मजदूर संघ और किसान संघ के साथ भी उनकी बैठकें होंगी।
अन्य संगठनों से बात करेंगे संघ प्रमुख
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संघ प्रमुख की चिंता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रमुख पदाधिकारियों से चर्चा के दौरान सामने आने वाले मुद्दों पर उन्होंने संबंधित संगठनों के अन्य लोगों से भी बातचीत करने का निर्णय किया है।
इसके लिए 29 अगस्त को लखनऊ में समन्वय बैठक बुलाई जाएगी। इन बैठकों से निकले निष्कर्षों को सामने रखकर भागवत भाजपा के लोगों से बात करेंगे।
इसके चलते पूर्व में स्थानीय स्तर पर होने वाली बैठकों को स्थगित कर दिया गया है।
केंद्र की नीतियों को लेकर संगठनों में गहरी नाराजगी
जानकारी के मुताबिक, कानपुर में पिछले दिनों प्रचारकों की बैठक के दौरान जो बातें संघ प्रमुख के सामने आईं, उससे सतर्क होकर उन्होंने बैठकों का सिलसिला शुरू किया है।
दरअसल, कानपुर बैठक में प्रचारकों ने केंद्र सरकार की नीतियों के कारण कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं में फैल रही नाराजगी की बात रखी। साथ ही बताया कि इसकी वजह से काम करने में काफी कठिनाई हो रही है।
यही नहीं, लंबे समय से संघ से जुड़े लोगों के सुर भी सरकार के खिलाफ होते जा रहे हैं। खासतौर से भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ और विहिप की तरफ से विशेष कठिनाई खड़ी होने की बात बताई गई।
ये संगठन तो सीधे सरकार से मोर्चा लेने को तैयार
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भारतीय मजदूर संघ की केंद्र सरकार से अनबन के स्तर का अंदाज तो इसी से लगाया जा सकता है कि उसने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का फैसला ले लिया है।
उसका आरोप है कि केंद्र की नीतियां सार्वजनिक उपक्रमों को बर्बाद कर रही हैं। रक्षा उपक्रमों में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत उनके हितों पर दुष्प्रभाव डालेगी। मजदूर संघ की आपत्ति आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देने और ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति करने को लेकर भी है।
किसान संघ भी नाराज
इसी तरह किसान संघ इस बात से नाराज है कि दो साल से ज्यादा बीतने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए कुछ नहीं हो पाया।
दैवी आपदा से किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र ने जो फैसले किए भी, उनकी जानकारी किसान संघ को नहीं दी।
अगर पहले से इन फैसलों की जानकारी दे दी जाती तो वह किसानों के बीच यह संदेश देने में सफल रहता कि किसान संघ की कोशिशों से ही सरकार ने ये फैसले किए हैं।