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भाजपा व संघ ने यूपी में अपना एजेंडा लागू करने पर की चर्चा, ये है प्लान

Tue, 25 Apr 2017 02:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा जिन कार्यकर्ताओं के बूते सत्ता तक पहुंची है उनका सम्मान बना रहना आवश्यक है। छोटे छोटे धार्मिक व सामाजिक आयोजन में कानून व्यवस्था के नाम पर कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
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वहीं, कार्यकर्ताओं को भी इस संयम, अनुशासन व  जिम्मेदारी के साथ बर्ताव करना होगा कि सूबे में अब उनकी सरकार है।

आरएसएस भाजपा संगठन और सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर बैठे लोगों के बीच सोमवार को यहां मुख्यमंत्री आवास पर लगभग तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली समन्वय बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाल ही में घटित घटनाओं पर चर्चा के दौरान सरकार की साख और कार्यकर्ताओं के सम्मान को बनाए रखने पर मनन किया गया।

संगठन व सरकार के बीच हर स्तर पर समन्वय के लिए जिलों में समन्वय समितियां बनाने पर सहमति हुई। संगठन व संघ की तरफ से सरकार को नसीहत दी गई कि राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के लोगों को ही तवज्जो मिले, यह संदेश न जाने पाए कि बाहरियों को नवाजा जा रहा है। इसी के साथ भगवा सरोकारों तक भी सरकार के तरफ से संदेश साफ देने की अपेक्षा की गई।
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भाजपा कार्यकर्ताओं का सम्मान अहम

सोमवार को दोपहर 3 बजे से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निवास पर आयोजित बैठक में राजनीतिक नियुक्तियों के लिए संघ व संगठन ने स्पष्ट मत रखा कि सभी लोगों को प्रमुख व महत्वपूर्ण पद नहीं मिल सकते हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच संदेश जाए कि सरकार ने उनके सम्मान का ध्यान रखा है।

भाजपा व संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि चुनाव में तो जिताऊ और बाहरी का प्रयोग सफल रहा है। लेकिन अब राजनीतिक नियुक्तियों में भाजपा के कार्यकर्ताओं को ही तवज्जो मिलनी चाहिए।

नियुक्तियों में यह संदेश नहीं जाए कि संगठन की जगह किसी गुट या व्यक्ति विशेष की छाप नजर नहीं आए। राजनीतिक नियुक्तियों में भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं को भी मौका मिलना चाहिए।

शिक्षा में ये किए जाएंगे बदलाव

समन्वय बैठक में प्रदेश में शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव कर योग, संस्कृत के साथ देश व प्रदेश की धार्मिक, ऐतिहासिक घटनाओं व व्यक्तियों को शामिल करने पर भी विचार किया गया।

बैठक में आगामी नगर निकाय चुनाव और संगठन में फेरबदल को लेकर भी अनौपचारिक विचार विमर्श किया गया। संघ की ओर से सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में चलाए जाने वाले जनकल्याण के कार्यों के  संचालन पर भी विचार विमर्श किया गया।

बैठक में आरएसएस के सर सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, डॉ.कृष्ण गोपाल, पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक शिवनारायण, पश्चिमी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक आलोक, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल, उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओमप्रकाश माथुर और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल मौजूद रहे।

कानून व्यवस्था के नाम पर कार्रवाई नहीं हो

संघ व संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास से ही भाजपा 15 वर्ष बाद सत्ता में लौटी है। सत्ता व संगठन को आपसी समन्वय से इस प्रकार काम करना होगा कि सरकार की साख भी कायम रहे और कार्यकर्ताओं का सम्मान भी बना रहे।

सहारनपुर में हुई घटना के जिक्र पर संघ का स्पष्ट मत रहा कि कानून व्यवस्था के नाम पर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित नहीं किया जाए ना ही उनका अपमान हो। जनता की उम्मीदें और कार्यकर्ताओं की अपेक्षा बहुत है इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी को वाजिब काम के लिए फोन करे तो वह अपमानित महसूस नहीं हो।

विचारधारा के अफसरों को आगे बढ़ाएं
संघ व संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि पुलिस, शासन व अन्य विभागों में बहुत से ऐसे अफसर व कर्मचारी हैं जो विचाराधारा व परिवार से जुड़े हैं।

उन्होंने संगठन का बुरे दिनों में भी साथ दिया है, अब पार्टी की सरकार बनी है तो उन्हें भी आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाए। वहीं सरकार में बहुत से पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जो पिछली सरकार की विचारधारा के अनुरूप ही काम कर रहे हैं।
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अब बहाना नहीं चलेगा

संघ व भाजपा का स्पष्ट मत है कि भाजपा को प्रदेश में 312 सीटों के साथ रिकार्ड जीत मिली है। सभी क्षेत्रों व जिलों में पार्टी को जीत मिली है इसलिए विधायक व मंत्रियों को यह समझना होगा कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा।

जो कुछ होगा उसकी जिम्मेदारी सरकार व संगठन की होगी इस चिंतन के साथ काम करना होगा। आम जनता, कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों सकारात्मक कार्यवाही होनी चाहिए।

सभी जिलों में बनेंगी समन्वय समितियां
समन्वय बैठक में निर्णय किया गया कि सभी जिलों में समन्वय समितियां गठित की जाएंगी। समिति में भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों के साथ संघ के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि व जिले के प्रभारी मंत्री भी रहेंगे।

समन्वय समिति के जरिए संबंधित जिले में जनता व कार्यकर्ताओं की समस्या का समाधान किया जाएगा। ताकि  जनता के बीच सत्ता व संगठन में तालमेल का संदेश जाए।
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