स्वर्गाश्रम की करोड़ों की जमीन पर भूमाफिया की नजर
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लखनऊ सीमा पर कई वर्षों से प्लॉटिंग कर रहे आरपी ग्रीन स्टेट नामक डेवलपर कंपनी के मालिक व बसपा नेता के ग्राम सभा की करोड़ों कीमत की जमीन बेचने के धंधे का भंडाफोड़ हुआ है। एसडीएम सदर ने जांच के बाद कंपनी के मालिक को भू-माफिया घोषित कर उनके खिलाफ राजस्व अधिनियम की धाराओं में बेदखली के 73 वाद दर्ज किए हैं। बताते हैं कि इस कंपनी के कब्जे में पाई गई सरकारी जमीन की कीमत डीएम सर्किल रेट से 70 करोड़ और बाजार में कीमत करीब डेढ़ सौ करोड़ आंकी गई है। जांच में यह भी पाया गया है कि 60 प्लॉट ऐसे लोगों को बेच दिए गए हैं जो मौके पर उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे सभी बैनामों की जिनकी दाखिल खारिज हो गई है उन सभी को निरस्त कर दोषी विक्रेता पर वैधानिक कार्रवाई का आदेश दिया गया है।
नवाबगंज तहसील के लखनऊ सीमा पर आरपी ग्रीन नामक कंपनी ने ग्राम टिकरिया, नईमऊ, बबूरी गांव, जबरीकला, चचेंडा एवं धौरियारा में की गई प्लॉटिंग में 4.8 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर रखा है। यही नहीं जांच में पाया गया कि कंपनी ने ग्राम टिकरिया एवं जबरीकला में 60 ऐसे प्लॉट बेच डाले जो मौके पर उपलब्ध ही नहीं हैं। यहीं अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की खरीदी गई पट्टे की भूमि कई गांवों में बिना राजस्व न्यायालय की अनुमति के खरीद डाला। यह भूमि कंपनी ने अपने एक कर्मचारी दीपक पुत्र मिश्रीलाल लखनऊ के नाम खरीदवाई। इन सब जमीनों को ग्राम सभा में निहीत करने की कार्रवाई शुरु कर दी गई है।
टिकरिया गांव में वन विभाग की चार हेक्टेयर भूमि पर दो वर्षो में कूटरचित ढंग से बेनामी पट्टे करवा लिए थे और कंपनी ने अपने नाम क्रय कर लिया। यही नहीं राजस्व कर्मियों की मिली भगत से इनकी अमल दरामद कर संक्रमणीय भी घोषित करा लिया। इसमें शामिल राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरु कराई गई है। तीन महीने तक एसडीएम की अगुवाई में हुई जांच में लगभग 12 हेक्टेयर भूमि की हेराफेरी कर मामला संज्ञान में आया है। एसडीएम ने बसपा नेता और कंपनी के मालिक आरपी सिंह एवं अन्य लोगों को भू-माफिया घोषित कर कार्रवाई शुरु की गई है।
नवाबगंज तहसील के एसडीएम सदर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरपी ग्रीन स्टेट कंपनी द्वारा तीन महीने की जांच में 12 हेक्टेयर भूमि की हेराफेरी करने के मामले संज्ञान में आए हैं। यह भूमि आउटर रिंग रोड के समीप होने के कारण इस भूमि की बाजार की कीमत 170 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस मामले में आरपी ग्रीन सिटी और आरपी ग्रीन स्टेट के डायरेक्टर राज प्रताप सिंह पर ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जा करने का उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 206 की धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई है।