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लाखों बच्चों को डायरिया से बचाएगा रोटा वायरस वैक्सीन, ये होगा शेड्यूल

Tue, 04 Sep 2018 03:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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रोटा वायरस वैक्सीन पिलातीं मंत्री रीता बहुगुणा जोशी - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में  महिला, बाल एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने मंगलवार को बच्चों को उल्टी-दस्त (डायरिया) से बचाने वाली रोटा वायरस वैक्सीन पिलाकर उसे नियमित टीकाकरण में शामिल कर दिया। ये पेंटा वैक्सीन के साथ प्रत्येक नवजात को उसके जन्म के छठे, 10वें और 14वें सप्ताह (डेढ, ढाई और साढ़े तीन माह) पिलायी जाएगी। ये वैक्सीन 57 लाख बच्चों को डायरिया से बचाएगी। 
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मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने एक स्थानीय होटल में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि रोटा वायरस बच्चों में उल्टी व दस्त का मुख्य कारण है। इसकी वजह से गंभीर अवस्था में बच्चों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। कभी-कभी दस्त जानलेवा भी हो जाते हैं। नियमित टीकाकरण में शामिल रोटा वायरस वैक्सीन बच्चों को गंभीर दस्त से सुरक्षा देगी।

राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एपी चतुर्वेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का 11वां राज्य है, जहां रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि इस वैक्सीन से डायरिया के कारण होने वाली मौतों में कमी आएगी।
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इसका कुपोषण दर और विकास संकेतकों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह वैक्सीन सबसे पहले भारत में नियमित प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत 2016 में उड़ीसा में शुरू की गई थी। बाद में इसे हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, हरियाण, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और झारखंड में शुरू किया गया।
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बच्चों को पिलायी जाएगी पांच बूंद

बच्चे को वैक्सीन पिलातीं मंत्री रीता बहुगुणा जोशी - फोटो : amar ujala
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पांच साल कम उम्र के बच्चों की मौतों में नौ फीसदी और भारत में 10 फीसदी के लिए डायरिया जिम्मेदार है। रोटा वायरस लगभग 40 फीसदी गंभीर डायरिया का कारण है। जिसके परिणाम स्वरूप देश में पांच साल से कम उम्र के लगभग 78 हजार बच्चों की मौत हुई है।

डायरिया हर मामले में भारतीय परिवारों की औसत वार्षिक आय का सात फीसदी खर्च होता है। इसकी वजह से कम आय वाले परिवार गरीबी की रेखा के नीचे चले जाते हैं। अनुमान है कि भारत हर साल रोटा वायरस डायरिया के प्रबंधन पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च करता है। यूनिसेफ के अमित मेहरोत्रा ने बताया कि वैश्विक स्तर पर रोटा वायरस बीमारी से निजात पाने के लिए 95 देशों में वैक्सीन की शुरुआत हो चुकी है।

वहां रोटा वायरस के कारण अस्पताल में भर्ती और मृत्यु की दर में कमी दर्ज की गई है। इस मौके पर परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक डॉ. नीना गुप्ता व अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. एपी चतुर्वेदी ने बताया कि पोलियो की  तरह ही रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जाएगी। पोलियो में दो बूंद तो रोटा वायरस में पांच बूंद वैक्सीन पिलाई जाती है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ रोटा वायरस टीकाकरण की शुरुआत हो रही है। एक वायल में पांच खुराक वैक्सीन है। रोटा वायरस से आंतों में संक्रमण हो जाता है। बहुत अधिक उल्टी-दस्त से शरीर में पानी व अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे बचाव को रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है। 
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