बच्चे को वैक्सीन पिलातीं मंत्री रीता बहुगुणा जोशी
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पांच साल कम उम्र के बच्चों की मौतों में नौ फीसदी और भारत में 10 फीसदी के लिए डायरिया जिम्मेदार है। रोटा वायरस लगभग 40 फीसदी गंभीर डायरिया का कारण है। जिसके परिणाम स्वरूप देश में पांच साल से कम उम्र के लगभग 78 हजार बच्चों की मौत हुई है।
डायरिया हर मामले में भारतीय परिवारों की औसत वार्षिक आय का सात फीसदी खर्च होता है। इसकी वजह से कम आय वाले परिवार गरीबी की रेखा के नीचे चले जाते हैं। अनुमान है कि भारत हर साल रोटा वायरस डायरिया के प्रबंधन पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च करता है। यूनिसेफ के अमित मेहरोत्रा ने बताया कि वैश्विक स्तर पर रोटा वायरस बीमारी से निजात पाने के लिए 95 देशों में वैक्सीन की शुरुआत हो चुकी है।
वहां रोटा वायरस के कारण अस्पताल में भर्ती और मृत्यु की दर में कमी दर्ज की गई है। इस मौके पर परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक डॉ. नीना गुप्ता व अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. एपी चतुर्वेदी ने बताया कि पोलियो की तरह ही रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जाएगी। पोलियो में दो बूंद तो रोटा वायरस में पांच बूंद वैक्सीन पिलाई जाती है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ रोटा वायरस टीकाकरण की शुरुआत हो रही है। एक वायल में पांच खुराक वैक्सीन है। रोटा वायरस से आंतों में संक्रमण हो जाता है। बहुत अधिक उल्टी-दस्त से शरीर में पानी व अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे बचाव को रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है।