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Lucknow News: 9 बेटिकट यात्रियों को कराया सफर, संविदा परिचालक की कर दी गई छुट्टी

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1096 बसों की जांच हुई, कार्रवाई नहीं करने पर 24 टीआई को नोटिस
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। रोडवेज बसों में बगैर टिकट यात्रा करवाने के मामले थम नहीं रहे हैं। 10 दिनों में ही दर्जनों ऐसे मामले प्रदेशभर में सामने आ चुके हैं। ताजा मामला सुलतानपुर का है, जहां बेटिकट यात्री पाए जाने पर परिचालक की संविदा खत्म कर दी गई।
बीती 16 जुलाई को स्टेट फ्लाइंग चेकिंग स्क्वैड ने बस नंबर यूपी 42 बीटी 5388 की चेकिंग के दौरान नौ यात्रियों को बिना टिकट पकड़ा था। बस सुलतानपुर डिपो की थी और ड्यूटी संविदा परिचालक पवन कुमार शुक्ल कर रहे थे। मोतिगरपुर से सुलतानपुर के लिए सात और कादीपुर से सुल्तानपुर के लिए दो यात्री सवार थे। जांच में यह बात सामने आई कि निरीक्षण स्थल तक यात्रियों का टिकट ही नहीं बनाया गया। मामले में दोषी संविदा परिचालक पवन कुमार शुक्ला की संविदा समाप्त कर दी गई। प्रबंधक प्रवर्तन गौरव वर्मा ने बताया कि उनके कार्यभार ग्रहण करने से अब तक की गई कार्रवाइयों में सौ से अधिक ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
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प्रवर्तन अफसर भी शक के घेरे में
रोडवेज प्रशासन की ओर से बीते मई में आई एक रिपोर्ट के अनुसार 24 प्रवर्तन कार्मिकों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने 1096 बसों की जांच की, लेकिन कार्रवाई की जानकारियां नहीं दी गईं। मामलों की पड़ताल के बाद सभी 24 टीआई को नोटिस भेजा गया। हद तो यह है कि दो टीआई ऐसे हैं, जिसमें से एक ने 144 और दूसरे ने 109 मामलों में कोई रिमार्क नहीं किया।
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मिलीभगत से होता है कारोबार
प्रवर्तन के कार्मिकों को बसों की चेकिंग के लिए कोड मिलता है। वे जितनी बसों की जांच करते हैं, उसको ब्यौरा भरते हैं। कोड के आधार पर वे-बिल बनता है, जिससे बसों की चेकिंग की जानकारी मिलती है। यह पूरा ब्यौरा पोर्टल पर दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि प्रतिदिन 25 बसों की जांच से बचने के लिए कई बार प्रवर्तन कार्मिक अपनी आईडी कंडक्टरों को दे देते हैं, जिसमें सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। कंडक्टर और प्रवर्तन कार्मिकों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।
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