लखनऊ। सड़क दुर्घटनाएं शरीर के साथ ही गंभीर आर्थिक चोट भी देती हैं। संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर में भर्ती हुए सड़क दुर्घटना के 22 फीसदी यानी हर पांचवें मामले में इलाज का खर्च घायल की क्षमता से बाहर पाया गया। छह महीने के आंकड़ों में यह बात सामने आई है।
यह रिपोर्ट संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक और अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश हर्षवर्धन के साथ ही डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. अनीता जे, डॉ. दीक्षा दुबे और डॉ. नैना मिश्रा ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जनवरी 2025 से जून 2025 तक के आंकड़े लिए गए। इस दौरान एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में कुल 3,841 घायल आए। इनमें से 845 मामले सड़क दुर्घटना के थे। इनमें से 83 फीसदी पुरुष और 17 फीसदी महिलाएं थीं। घायलों के कुल बिल, दवाई और जांच आदि के खर्च जोड़े गए। इस आधार पर घायलों की क्षमता से बाहर वाले इलाज खर्च का आकलन किया गया। देखा गया कि इलाज पर 543 रुपये से 2,81,131 रुपये का खर्च आया। पहले 24 घंटे में निशुल्क इलाज और आयुष्मान भारत योजना के तहत 543 रुपये से 2,34,801 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिली। इसके बावजूद करीब 22 फीसदी मामलों में इलाज का खर्च घायल की क्षमता से बाहर था।
चार पहिया वाहनों की टक्कर के मामले सबसे ज्यादा
अध्ययन में यह भी देखा गया कि दुर्घटना के सबसे ज्यादा 32 फीसदी मामले चार पहिया वाहनों की आपस में टक्कर के थे। इसके बाद 23.4 फीसदी मामलों में दो पहिया वाहन की टक्कर चार पहिया वाहन से हुई थी। 22.7 मामले दो पहिया वाहनों की आपस में टक्कर के थे। आठ फीसदी मामले चार पहिया वाहन ने पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मारी थी।
घायलों की औसत आयु 33 वर्ष
यह भी देखा गया कि घायलों की औसत आयु 33 वर्ष थी। इसका मतलब घायलों में कमाई करने वाली आबादी ज्यादा थी। इलाज के दौरान 17 फीसदी को 15 दिन और करीब छह फीसदी को 15 दिन से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। अन्य को एक ही दिन में छुट्टी दे दी गई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी काफी दिन तक घायल अपने काम पर वापस नहीं जा सके। इससे भी उनकी आमदनी का नुकसान भी हुआ।
55 फीसदी घायल लखनऊ के
अध्ययन में शामिल कुल घायलों में से 55 फीसदी लखनऊ के थे। इनके अलावा 565 किलोमीटर की दूरी तक से घायलों को एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। सबसे ज्यादा सात फीसदी घायल रायबरेली जिले के थे। अन्य घायल अमेठी, अयोध्या, बाराबंकी, इटावा, गाजीपुर, गोरखपुर, हरदोई, मिर्जापुर, कानपुर, जौनपुर, सीतापुर और उन्नाव के थे।
घृताक्षी संगीतशाला संस्था की ओर से गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में नमामि कृष्णम
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