आखिरकार गोमती तट विकास परियोजना (रिवर फ्रंट डवलपमेंट प्रोजेक्ट) का खाका एलडीए ने तैयार कर लिया है।
जैसा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चाहते थे,अब परियोजना को गोमती नदी की सफाई और तट की स्वच्छता तक ही सीमित कर दिया गया है।
अब विकास कार्यों पर 35 करोड़ रुपये खर्च होंगे,जबकि पहले यह बजट करीब 400 करोड़ रुपये का था। 1.7 किलोमीटर के पहले चरण में काम नदवा कॉलेज तट से हनुमान सेतु तट तक किया जाएगा।
खर्च प्राधिकरण अकेले नहीं करेगा। इसमें नगर निगम,जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा),पीडब्ल्यूडी और एलडीए खुद शामिल होगा।
मुख्य रूप से तटों के आसपास के घरों में शौचालय बनाना, तट से कूड़े की उठान करा कर जमीन बराबर करना,नए सिरे से घास लगवाना और पाथवे बनाने का काम किया जाएगा।
नदी में सफाई और ड्रेजिंग का काम सिंचाई विभाग करेगा। इसके लिए अलग से बजट मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि परियोजना का नवंबर में मुख्यमंत्री शिलान्यास कर सकते हैं। पहले गोमा तटों के विकास के लिए बड़ी परियोजना लाई गई थी।
इसमें आईआईएम पुल घाट से लेकर गोमती बैराज घाट तक तटों का सुंदरीकरण किया जाना था। इसके तहत सांस्कृतिक स्थल, हा, कामर्शियल कांप्लेक्स, पार्क, रेस्टोरेंट, मेट्रो वाटर टैक्सी,जाइंट व्हील लखनऊ आई और ऐसे ही अन्य परिकल्पनाओं को शामिल किया गया था।
मगर इन सबको फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जर्मन आर्किटेक्ट कंपनी अरबन एक्वा ने अपने लखनवी कंसोर्टियम के साथ यह डिजाइन तैयार किया गया। इसके लिए आईआईटी रुड़की से हाइड्रोलाजिकल स्टडी भी कराई गई थी।
कई स्तर पर प्रस्तुतिकरण के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने परियोजना को सूक्ष्म करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केवल गोमती की सफाई और तटों की स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए।
फिलहाल इतना ही काफी होगा। बाकी काम आगे के चरण में करवाए जाते रहेंगे। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि यह प्रस्ताव बहुत जल्द ही शासन में प्रेषित किया जाएगा। शासन की ओर से ही धन प्राधिकरण को उपलब्ध कराया जाएगा।
यहां ड्रेजिंग और गोमती सफाई का काम सिंचाई विभाग कराएगा। इसके अलावा ड्रेजिंग कराई जाएगी। यह भी सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी होगी। इसके अतिरिक्त गोमा में नाले सीधे न गिरें,इसके लिए जल निगम को काम करना पड़ेगा।
ये काम कराए जाएंगे
तट विकास के लिए हनुमान सेतु से नदवा कॉलेज के 1.7 किमी में काम होगा। तटों के किनारे सघन सफाई अभियान चलेगा। कूड़ा डालना प्रतिबंधित।
तटों पर नए सिरे से घास उगाई जाएगी। तट को ग्रीन कॉरपेट का रूप दिया जाएगा। यहां शौच करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा।
पांच करोड़ रुपये में बस्ती के घरों में शौचालय बनेंगे। तटों के किनारे टहलने के लिए पाथवे बनाए जाएंगे। इसके अलावा तट के लिए रोड भी बनेगी।