मां बनने की सही उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच होती है। इसके पहले या बाद में गर्भधारण करने पर गर्भस्थ शिशु में विकृति की आशंका अधिक होती है।
ये विकृतियां क्रोमोसोम (गुणसूत्रों) या जीन में गड़बड़ी होने से आती हैं। इसलिए अधिक उम्र में गर्भ धारण करने से बचना चाहिए।
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संजय गांधी पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो.एस.एस.अग्रवाल ने ये बात किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) के 81वें स्थापना दिवस के मौके पर कहीं।
प्रो.एस.एस.अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी परिवार में पहले पैदा हुए बच्चों में जन्मजात विकृतियां पाई गई हैं तो भावी पीढ़ी को गर्भधारण करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लेना चाहिए।
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इससे उसके बच्चों में विकृतियों की संभावना को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नवविवाहित को इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए।
अमेरिका से आए डॉ. केसर ब्लीकमोर ने बताया कि जन्मजात होने वाली विकृतियों को गर्भ में ही पहचानना आसान हो चुका है। यही नहीं, स्टेम सेल प्रत्यारोपण कर बच्चे की विकृति को दूर भी किया जा सकता है।
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इन यूट्रो स्टेमसेल ट्रांसप्लांटेशन विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि अनुवांशिक बीमारियां मुख्य रूप से जीन की गड़बड़ी से होती हैं।
डॉ. केरन ने कहा कि स्टेम सेल प्रत्यारोपण तकनीक की सफलता का पूरा दावा नहीं किया जा सकता है क्योंकि अभी यह तकनीक ट्रायल पर है। बताया कि एक शिशु 46 हजार जीन से बनता है।
जिसमें 23 हजार जीन मां के और 23 हजार जीन पिता के होते हैं। एक भी जीन में गड़बड़ी हुई तो वह पैदाइशी विकृति या बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है।