आयुष कॉलेजों में हेराफेरी कर दाखिला दिलाने के मामले में अब काउंसिलिंग से जुड़े अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। पूछताछ के बाद कई प्रबंधक, डॉक्टर और नेता भी एसटीएफ के निशाने पर आ सकते हैं।
नीट 2021 के तहत हुए दाखिले में 891 छात्र संदिग्ध पाए गए हैं। इनकी काउंसिलिंग के लिए बनी कमेटी के अध्यक्ष आयुष विभाग के विशेष सचिव खुशलाल भारती थे। जबकि सदस्य सचिव प्रो. एसएन सिंह थे। इसी तरह अपर मुख्य सचिव की ओर से नामित सदस्य में संयुक्त सचिव लक्ष्मण सिंह, राजकीय तकमील कॉलेज लखनऊ के डॉ. बच्चू सिंह एवं डॉ. मजाहिर आलम, राजकीय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज के डॉ. एसएस पाल और डॉ. अशोक कुमार सिंह शामिल थे। आयुर्वेद निदेशालय से डॉ. उमाकांत, यूनानी निदेशालय से डॉ. मोहम्मद वसीम और होम्योपैथी से डॉ. वीके पुष्कर नामित थे। इसी तरह निजी क्षेत्र के कॉलेजों के प्रतिनिधि के रूप में जामिया तिब्बिया यूनानी कॉलेज देवबंद सहारनपुर, भारत आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज मुजफ्फरनगर और वैक्सन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज नोएडा के प्रतिनिधि को शामिल किया गया था।
निदेशक प्रो. एसएन सिंह और आयुर्वेद निदेशालय से नामित डॉ. उमांकात निलंबित होने के बाद गिरफ्तार हो चुके हैं। यूनानी के डॉ. मोहम्मद वसीम और होम्योपैथिक के डॉ. वीके पुष्कर के खिलाफ भी विभागीय जांच चल रही है। हालांकि अन्य लोगों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग में चर्चा है कि इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद काउंसिलिंग कमेटी के अन्य सदस्यों पर भी एसटीएफ हाथ डाल सकती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि डॉक्टरों के साथ अफसरों और नेताओं को भी पूछताछ के दायरे में लाया जा सकता है। क्योंकि दाखिले में इनके भी परिजनों का नाम आया है।
शासन स्तर से नामित हुई थी काउंसिलिंग का काम देखने वाली एजेंसी
विभाग में काउंसिलिंग का काम देखने वाली एजेंसी का निर्धारण शासन स्तर से हुआ था। शासन द्वारा अपट्रान को नामित किया गया और फिर अपट्रान ने वेंडर के रूप में वी3 साल्यूशन प्रा. लि. को काम सौंपा। वेंडर एजेंसी को स्पष्ट किया गया था कि वह दस्तावेजों की गोपनीयता के लिए जिम्मेदार होगी। विभाग में डाक्यूमेंट के रखरखाव का जिम्मा भी दिया गया। छात्रों का पंजीकरण, डाटा कैप्चर, फोटो अपलोड, शुल्क भुगतान, छात्रों की स्टेट मेरिट लिस्ट तैयार कर सीट आवंटन और काउंसिलिंग स्थल पर छात्रों को बुलाने, उनके अभिलेखों के सत्यापन, चयन होने पर अलार्टमेंट की जिम्मेदारी दी गई थी।
अब निदेशक के साथ ही एजेंसी का काम देखने वाला कुलदीप भी गिरफ्तार हो गया है। ऐसे में कुलदीप के संपर्क में रहने वाले अन्य अधिकारी भी चपेट में आ सकते हैं। यह भी आशंका जाहिर की जा रही है कि कुलदीप की पैरवी करने वाले शासन स्तर के अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। क्योंकि उसे काम सौंपने के लिए बाकायदा लिखित पत्र जारी किए गए हैं। एजेंसी ने विभाग की सरकारी व निजी क्षेत्र की कुल 7338 सीटों के सापेक्ष 6797 सीट पर काउंसिलिंग कराई।
आयुष के कई कर्मियों के बच्चों और रिश्तेदारों का हुआ है दाखिला
आयुष कॉलेजों में दाखिले की जिम्मेदारी 2019 से कुलदीप संभालता रहा है। वह आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ के कई चिकित्साधिकारियों के संपर्क में रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन चिकित्साधिकारियों के बच्चों व रिश्तेदारों का भी विभिन्न कॉलेजों में दाखिला हुआ है। खासतौर से निदेशालय में रहने वाले अधिकारियों ने अलग-अलग सत्र में अपने बच्चों का दाखिला कराया है। ऐसे में जांच की आंच उन तक पहुंच सकती है।