लखनऊ। एक तरफ अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की बात, दूसरी तरफ सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर भूमि पूजन समारोह अपनी समाप्ति की ओर बढ़ा। दूसरे दिन मंगलवार को सांस्कृतिक मंच ग्रेमी पुरस्कार विजेता रिकी केज और बांसुरी वादन के जरिए विशेष पहचान रखने वाली रसिका शेखर के हवाले था। दोपहर में रिकी ने युवाओं को खूब झुमाया, शाम को रसिका की धुन पर लोग सम्मोहित हो गए। इसके अलावा शहर में बनाए गए अनेक मंचों पर मयूर, फरुवाही, अवधी, राई, बमरसिया आदि लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी खास रहीं।
पंडाल में गूंजा हर-हर महादेव
रिकी केज व उनकी टीम ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मेन हैंगर में देवी सुरेश्वरि भगवती गंगे... भजन के जरिये सबसे पहले गंगा नदी की महिमा का वर्णन किया गया। इसके बाद पधारो म्हारे देश.... सुनाया। बम लहरी- ओम नमः शिवाय सुनाते ही पूरा पंडाल हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। सुधीर यदुवंशी ने इसे स्वरों से सजाया तो की-बोर्ड पर रिकी केज, गिटार पर सिद्धार्थ, बांसुरी पर वारिजा श्री व ड्रम पर प्रमथ किरण ने संगत की।
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आध्यात्मिकता के रस में भीगी धुन में खिंचे आए श्रोता
बॉलीवुड गायिका रसिका शेखर ने आते ही कौन कहता है भगवान आते नहीं....सुनाकर माहौल में आध्यात्मिकता का रस घोला। शांति की अनुभूति कराने वाली प्रस्तुतियों के बीच उन्होंने होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो..., आज जाने की जिद न करो... गीतों पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बांसुरी वादन भी किया। रसिका के साथ जिगर शाह ने ड्रम, चैतन्य ने गिटार, कीबोर्ड पर अर्चित शाह, विवियन डिसूजा और कर्ण चित्रा देशमुख ने संगत की।