लखनऊ। संस्कृति विभाग व संगीत नाटक अकादमी की ओर से पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी की स्मृति में पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संगीत नाटक अकादमी में हुए इस आयोजन के दौरान देश के सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली धुन से श्रोताओं का दिल जीत लिया। वरिष्ठ तबला वादक पंडित कुमार बोस के ने भी खूब रंग जमाया। गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के गायन ने समारोह का आकर्षण बढ़ाया।
इस दौरान संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि संगीत के बिना जीवन अधूरा है। संस्कृति विभाग हर जिले में महोत्सव का आयोजन कर कलाकारों को प्रोत्साहित कर रहा है। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने समारोह का आगाज राग मारू विहाग से किया। बांसुरी के स्वरों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस शाम को अपनी खनकदार आवाज से यादगार बनाने वाली पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने ठुमरी राग खम्बावती में निबद्ध होली खेलो मोसे नंद लाल... सुनाई। इसके बाद सइयां मिले लरकइयां... से लेकर दादरा बहिया छोड़ो न बलम... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। रंग डालूंगी नंद के लालन पे..., बैरन भई रतिया, बिना पिया निंदिया न आवे ओ रामा... के अलावा गया शैली की चैती बैरन रे कोयलिया तोहरी बोली न सुहाए... सुनाकर शाम को परवान चढ़ाया। हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्रा, तबले पर रामकुमार मिश्रा, बांसुरी पर देबोप्रिया रानादीव और जय गांधी ने उनका साथ दिया। इस दौरान उन्होंने प्रो. कमला श्रीवास्तव और पद्मश्री राज बिसारिया को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन अलका निवेदन ने किया। इस दौरान संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम, निदेशक शिशिर कुमार सिंह, विशेष सचिव राकेश चंद्र शर्मा और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर आदि मौजूद रहे।