लखनऊ। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के नियमों में किया गया बदलाव बृहस्पतिवार से लागू हो गया। अब दो साल बाद आवेदन करने वालों के प्रमाणपत्र प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन के बाद यह बदलाव किया गया है।
इस बदलाव के संबंध में अमर उजाला ने 23 सितंबर को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। अब किसी जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है तो उसका पंजीकरण तभी होगा जब जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से सत्यापन के बाद आदेश दिया जाएगाा। इसी तरह यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल बाद दी जाती है तो पंजीकरण प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा। ऐसे में साफ है कि अब दो साल से अधिक पुराने मामलों में बिना कोर्ट के आदेश के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनेगा। अभी तक एसडीएम के यहां से ही इन मामलों में भी आदेश हो जाता था। नगर निगम के जन्म-मृत्यु अनुभाग के प्रभारी अनिल शुक्ला ने बताया कि दो साल से पुराने आवेदनों की अब फीडिंग ही नहीं हो पा रही है। जैसे ही इसे फीड किया जाता है तो सबसे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश की संख्या मांगी जाती है।
केंद्रीय पोर्टल में जन्म-मृत्यु के दो साल से अधिक देरी के मामले में आदेश को लेकर किया बदलाव लागू हो गया है। अब इन मामलों में आवेदकों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां से आदेश कराना होगा।
- दिव्या जैन, अधिकृत प्राधिकारी जनगणना, लखनऊ